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Margashirsha Amavasya 2025: मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के विशेष उपाय, तर्पण-दान से मिलेगा आशीर्वाद

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Nov 18, 2025 07:35 am IST,  Updated : Nov 18, 2025 07:35 am IST

Margashirsha Amavasya 2025: मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान, विष्णु पूजा और पितरों के लिए तर्पण करने की खास परंपरा है। पितरों की तृप्ति के लिए अन्न, वस्त्र, तिल और उड़द दान करना शुभ होता है। अमावस्या पर किए गए इन उपायों से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

Margashirsha Amavasya ke upay- India TV Hindi
मार्गशीर्ष अमावस्या के उपाय Image Source : PTI

Margashirsha Amavasya 2025 Upay: 20 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष (अगहन) अमावस्या पड़ रही है। मार्गशीर्ष अमावस्या हिंदू पंचांग की एक बेहद महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन पितरों की पूजा, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए पूजा-पाठ, स्नान और दान से न सिर्फ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि भी बढ़ती है।पौराणिक मान्यता के अनुसार यह समय भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन की गई साधना कई गुना फल देती है। चलिए जानते हैं कि इस दिन कौन से उपाय किए जाने चाहिए, जिससे कि आपके ऊपर आपके पितरों का आशीर्वाद हमेशा बना रहे। 

Margashirsha Amavasya 2025: पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

1. मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर को मनाई जाएगी। शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास को भगवान श्री कृष्ण ने अपना स्वरूप बताया है। ऐसा माना जाता है कि इस माह की अमावस्या पर पूजा, दान और पितरों की साधना बहुत फलदायी होती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करने से परिवार पर देवी-देवताओं और पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।

2. पितरों की तृप्ति क्यों जरूरी?

हिंदू धर्मग्रंथों में यह वर्णित है कि अमावस्या पर पितर अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और अन्नदान की अपेक्षा करते हैं। इसलिए इस दिन विधि-विधान से किए गए कर्म पितरों को तृप्त कर मोक्ष का मार्ग देते हैं। माना जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली आती है।

3. मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि

अगहन अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी या जल-तीर्थ पर स्नान करने का विशेष महत्व है। स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु की पूजा करें। श्री हरि की कृपा पाने के लिए श्री विष्णु चालीसा या सहस्त्रनाम का पाठ बेहद शुभ फल देता है। पूजा के बाद पितरों के लिए तर्पण और अन्न दान करें।

4. तर्पण करने की विधि

तर्पण से पहले गंगाजल छिड़ककर स्थान शुद्ध करें और एक दीप जलाएं। दिवंगत परिजनों का फोटो दक्षिण दिशा में रखकर मंत्रों के साथ पितरों का आह्वान करें। कुशा, काला तिल और पुष्प जल से भरे लोटे में रखकर “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र बोलते हुए जल अर्पित करें। अंत में पितरों से क्षमा मांगकर परिवार के सुख-सौभाग्य की कामना करें।

5. अमावस्या पर दान करने योग्य चीजें

सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करें। चावल, गेहूं, काले तिल, उड़द, कंबल, वस्त्र और धन का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न सिर्फ पितरों को तृप्त करता है, बल्कि राहु-केतु के दोष भी दूर करता है। इसके बाद गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना भी बहुत फलदायी होता है।

6. तर्पण और दान के लाभ

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या पर किए गए तर्पण और दान से पितृदोष खत्म होता है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में शांति बनी रहती है। पशु-पक्षियों को दाना डालना पुण्य फल देता है और परिवार में खुशियों का आगमन होता है।

7. इन बातों का रखें ध्यान

  • पवित्र नदी में स्नान अवश्य करें
  • तर्पण और दान करना न भूलें
  • काले कपड़े न पहनें
  • तिल का दान अवश्य करें
  • घर और मंदिर की साफ-सफाई रखें
  • किसी के प्रति नकारात्मक विचार न रखें
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