बॉक्स ऑफिस पर इस साल आदित्य धर के निर्देशन में बनी 'धुरंधर 2' का जलवा देखने को मिला, जिसने वर्ल्डवाइड 1800 करोड़ से ज्यादा की कमाई से सबको चौंका दिया। इस फिल्म में रणवीर सिंह ने 'हमजा' के किरदार से हर किसी को अपना फैन बना लिया। इस फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा संजय दत्त, राकेश बेदी, सारा अर्जुन, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकार भी अहम भूमिका में नजर आए और सभी कलाकारों ने अपना 100 प्रतिशत दिया। 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया, जिसमें उन्हें काफी पसंद किया गया। अब अभिनेता एक और धांसू किरदार के साथ दर्शकों के बीच दस्तक दे चुके हैं। अर्जुन रामपाल 'धुरंधर 2' के बाद अब दिलजीत दोसांझ स्टारर 'सतलुज' में अपनी भूमिका के लिए सुर्खियां बटोर रहे हैं, जो हाल ही में ओटीटी पर रिलीज हुई है।
'सतलुज' में अर्जुन रामपाल का कमाल
दिलजीत दोसांझ स्टारर 'सतलुज' लंबे समय से सेंसरशिप के झमेले में फंसी थी। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की ये बायोपिक पहले 'पंजाब 95' के नाम से रिलीज होने वाली थी, लेकिन सीबीएफसी से क्लीयरेंस मिलने में हो रही देरी के बाद अब जाकर रिलीज हो सकी। लंबी लड़ाई के बाद दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म का रास्ता साफ हुआ और ये अब 'सतलुज' के नाम से रिलीज हुई है, जिसमें अर्जुन रामपाल भी अहम भूमिका में हैं। फिल्म में अर्जुन रामपाल ने सीबीआई अधिकारी 'समुद्र सिंह' की भूमिका में हैं। फिल्म में वह एक न्यायप्रिय और संवैधानिक जांच अधिकारी के किरदार में हैं, जो जसवंत सिंह खालड़ा की गुमशुदगी की जांच करते हैं और उनके किरदार को काफी पसंद किया जा रहा है।
क्या है सतलुज की कहानी?
पंजाब में 1970 के दशक के अंत तक खालिस्तानी आंदोलन जोर पकड़ चुका था। वहीं 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पंजाब में सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए। जिसके बाद पंजाब ने एक दशक से ज्यादा समय तक खूनी दौर चलता रहा और इसमें पंजाब पुलिस पर भी बहुत बड़ा दाग लगा था। ये दाग था बिना किसी सबूत के लोगों को आतंकवादी बताकर उनका एनकाउंटर कर देना। 'सतलुज' की कहानी इसी दौर में सच के लिए खड़े हुए मानवाधिकार एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पंजाब के सेंट्र्ल को-ऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर थे। जसविंदर सिंह खालड़ा ने पंजाब में अचानक गायब हो रहे लोगों की खोज की शुरुआत तब की जब उनका एक साथी अचानक गायब हो जाता है। अपने साथी की खोज में उन्हें पता चलता है कि पुलिस ने उसका एनकाउंटर करके उसका अंतिम संस्कार कर दिया है।
जसवंत सिंह खालड़ा की रिसर्च और इसकी कीमत
अपने साथी के एकाउंटर से दुखी जसवंत सिंह खालड़ा ऐसे मामलों पर रिसर्च शुरू करते हैं, जिनमें दावा किया गया कि पंजाब पुलिस सैकड़ों लोगों की गैर-कानूनी रूप से हत्या कर अंतिम संस्कार कर चुकी है। पहले तो पुलिस ने इनकार किया और जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए। पता चला कि 1984 से 1994 तक के बीच सिर्फ 3 ही जिलों में पंजाब पुलिस 2000 से ज्यादा लावारिस शवों के अंतिम संस्कार कर चुकी है और जसवंत सिंह को इस खोजबीन का ये हर्जाना भुगतना पड़ा कि एक दिन पुलिस उन्हें उनके ही घर से ले गई और फिर वह कभी नहीं मिले। सीबीआई ने जांच में पाया कि जसवंत सिंह खालड़ा का भी एनकाउंटर कर दिया गया है। इस मामले में आरोपी चार पुलिस अधिकारियों को उम्र कैद की सजा हुई। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने इन्हीं जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है।
सतलुज की कास्ट
सतलुज की कास्ट की बात करें तो इसमें दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल के अलावा कंवलजीत सिंह, गीतिका विद्या ओल्यान और सुविंदर विक्की भी अहम भूमिका में हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित ये फिल्म अगर आप देखना चाहते हैं तो ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर ये फिल्म देख सकते हैं।
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