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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी को क्यों कहा जाता है भीमसेनी एकादशी? जानें इसके पीछे की रोचक कथा और महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jun 02, 2026 05:02 pm IST,  Updated : Jun 02, 2026 05:02 pm IST

Nirjala Ekadashi Story: निर्जला एकादशी पूरे साल की सबसे बड़ी और कठिन एकादशी व्रत मानी जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की बेहद रोचक पौराणिक कथा, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

निर्जला एकादशी 2026- India TV Hindi
निर्जला एकादशी 2026 Image Source : INDIA TV

Nirjala Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन नारायण की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है। एकादशी व्रत करने वालों पर लक्ष्मी पति श्री हरि की विशेष कृपा भी बरसती है। प्रत्येक माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। दोनों ही एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन इन सभी में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सर्वोच्च माना गया है। इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल भी ग्रहण करने की मनाही है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साल की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का व्रत रखने से बाकी सभी एकादशियों के व्रत जितना पुण्य मिल जाता है। तो जो लोग पूरे साल की एकादशी व्रत नहीं रख सकते हैं वे केवल निर्जला एकादशी का व्रत कर के भी शुभ फल पा सकते हैं। वहीं आपको बता दें कि निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं कि निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है।

निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी?

पौराणिक कथा के अनुसार, कुंती पुत्र भीम खाने पीने के अत्यंत ही शौकीन थे और उन्हें अपने भूख पर बिल्कुल भी नियंत्रण नहीं था। इसी वजह से वह एकादशी व्रत को नहीं कर पाते थे। भीम के अलावा बाकी पांडव भाई और द्रौपदी पूरे साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे। भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान रहते थे। इस दुविधा से उभरने के लिए भीम महर्षि व्यास के पास गए तब महर्षि ने उन्हें साल में एक बार निर्जला एकादशी व्रत को करने कि सलाह दी और कहा कि निर्जला एकादशी साल की चौबीस एकादशियों के तुल्य है। इसी पौराणिक कथा के बाद निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से जाना जाने लगा।

निर्जला एकादशी (भीमसेनी एकादशी) शुभ मुहूर्त और पारण का समय

  • एकादशी तिथि प्रारंभ - जून 24, 2026 को 06:12 पी एम बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त - जून 25, 2026 को 08:09 पी एम बजे
  • एकादशी का पारण तिथि- 26 जून 2026
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 06:03 ए एम से 08:42 ए एम
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 10:22 पी एम

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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