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11 सितंबर को मनाई जाएगी भाद्रपद अमावस्या, पितरों को प्रसन्न करने के लिए जरूर करें ये 5 काम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 09, 2026 04:31 pm IST,  Updated : Sep 09, 2026 04:38 pm IST

हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पूर्वजों का ध्यान और पूज करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल 11 सितंबर 2026 को भाद्रपद अमावस्या मनाई जाएगी।

भाद्रपद अमावस्या 2026- India TV Hindi
भाद्रपद अमावस्या 2026 Image Source : MAGNIFIC

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पितृ पूजन और पूर्वजों का स्मरण किया जाता है। भाद्रपद माह की अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। भाद्रपद अमावस्या के दिन इन कामों करने से पितृ अति प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये 5 काम

1. तर्पण

भाद्रपद अमावस्या के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इसके बाद काले तिल, कुश और जल हाथ में लेकर पितरों का ध्यान करते हुए तर्पण करें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

2. दान 

अमावस्या के दिन दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन अपनी क्षमतानुसार गरीब और जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। इसके साथ ही भोजन कराना भी पुण्यकारी होता है। इसके अलावा  गाय, कौआ, कुत्ते और अन्य जीवों के लिए खाना निकाल कर रखें।

3. श्राद्ध और पिंडदान

भाद्रपद अमावस्या के दिन गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी में स्नान-दान करें। इसके साथ ही ब्राह्मण के माध्यम से पितरों का विधि-विधान से पिंडदान या श्राद्ध कराएं। अगर कहीं जाना संभव नहीं है तो घर पर भी करा सकते हैं।

4. पीपल पेड़ की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल पेड़ में त्रिदेव और पितरों का वास होता है। ऐसे में भाद्रपद अमावस्या के दिन पीपल पेड़ के पास सरसों तेल का दीया जलाएं और परिक्रमा करें।

5. दीया जलाएं

अमावस्या के दिन शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है।

अमावस्या के दिन न करें ये काम

  • पितरों के स्मरण के कार्यों को न भूलें
  • तामसिक भोजन का सेवन न करें
  • क्रोध, क्लेश न करें
  • बड़े-बुजुर्ग का अपमान न करें
  • जीव-जंतु और कुत्ते कौवा को परेशान न करें
  • किसी जरूरतमंद को घर से खाली हाथ न लौटाएं

पितरों को प्रसन्न रखना क्यों है जरूरी

हिंदू धर्म में मान्यता है कि अगर पितृ नाराज होते हैं तो व्यक्ति को कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष रहता है उसे आर्थिक, स्वास्थ्य से लेकर अन्य दूसरी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं अगर पितृ प्रसन्न रहते हैं तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है। परिवार के सदस्य खूब तरक्की करते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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