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Rama Ekadashi 2025: रमा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 16 या 17 अक्टूबर? जानें सही डेट और पूजा विधि

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 15, 2025 01:34 pm IST,  Updated : Oct 15, 2025 01:34 pm IST

Rama Ekadashi 2025: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल रमा एकादशी अक्टूबर के माह में है। ऐसे में आइए जान लेते हैं रमा एकादशी किस दिन और और इस दिन कैसे आपको पूजा करनी है।

Rama Ekadashi 2025- India TV Hindi
रमा एकादशी 2025 Image Source : INDIA TV

Rama Ekadashi 2025: रमा एकादशी का व्रत हर वर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। दीपावली से पहले आने वाले इस व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। रमा एकादशी का व्रत रखने वाले जातकों की मनोमाकमनाएं भगवान विष्णु पूरी करते हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं रमा एकादशी व्रत की डेट और इस दिन की जाने वाली पूजा की विधि।   

रमा एकादशी 2025 तिथि (Rama Ekadashi Date)

पंचांग के अनुसार रमा एकादशी का व्रत कार्तिक माह कृष्ण एकादशी को रखा जाता है। साल 2025 में रमा एकादशी तिथि 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 37 मिनट से शुरू और जाएगी और 17 अगस्त को सुबह 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार रमा एकादशी का व्रत 17 अक्टूबर को ही किया जाएगा। 

रमा एकादशी पूजा विधि (Rama Ekadashi Puja Vidhi)

रमा एकादशी के दिन व्रत रखने वालों को सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान-ध्यान कर लेना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र आपको धारण करने चाहिए। इस दिन पीले और सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद आपको पूजा स्थल को भी साफ करना चाहिए और यहां गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल से आपको अभिषेक करना चाहिए। भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी को फल, फूल इत्यादि आपको अर्पित करने चाहिए और साथ ही दीप जलाना चाहिए। पूजा में तुलसी पत्र भी इस दिन अवश्य अर्पित करें। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा शुरू करें। पूजा के दौरान विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ आपको करना चाहिए या फिर श्रीसूक्त का पाठ भी आप कर सकते हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप भी आपको करना चाहिए। इसके बाद एकादशी व्रत की कथा का पाठ और अंत में लक्ष्मी-विष्णु जी की आरती आपको करनी चाहिए। इस प्रकार एकादशी की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।  

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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