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25 अगस्त को सावन का आखिरी प्रदोष व्रत, कर्ज से छुटकारा दिला सकता है भौम प्रदोष व्रत, जानिए पूजा विधि

 Written By: Arti Azad
 Published : Aug 23, 2026 01:53 pm IST,  Updated : Aug 23, 2026 01:53 pm IST

25 अगस्त को सावन का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार होने से यह भौम प्रदोष कहलाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिव आराधना करके कर्ज से मुक्ति से राहत की कामना की जाती है। जानिए इस तिथि का महत्व और पूजा की सही विधि।

Pradosh Vrat 2026- India TV Hindi
भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि Image Source : INDIA TV

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का महत्व भी बढ़ जाता है। इस बार सावन का आखिरी प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन रखा जाएगा, इसलिए इसे भौम प्रदोष कहा जाएगा। सावन के अंतिम प्रदोष के अवसर पर देश भर के शिवालयों में शाम के समय विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक होंगे। श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करेंगे। जानिए भौम प्रदोष की संपूर्ण पूजा विधि। 

भौम प्रदोष व्रत 2026

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार सावन का अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त को रखा जाएगा। 

भौम प्रदोष व्रत से कर्ज मुक्ति की मान्यता

भौम प्रदोष को मंगल प्रदोष भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत और भगवान शिव की आराधना से साधक को आर्थिक परेशानियों से राहत और कर्ज से छुटकारा मिलता है। भूमि और भवन से जुड़े विवादों के समाधान के लिए भी इस दिन शिव पूजा की मान्यता है। मंगल से संबंधित परेशानियों को दूर करने के लिए भी भौम प्रदोष का विशेष महत्व बताया गया है।

भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

भौम प्रदोष के दिन सुबह से ही सात्विक दिनचर्या रखें और शाम के समय विधि-विधान से शिव आराधना करें।

  • सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर शिव जी और मां पार्वती का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग की पूजा करें। सबसे पहले शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करें।
  • इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करें।
  • पूजा के दौरान 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। इसके साथ शिव चालीसा, शिव स्तुति या भगवान शिव से जुड़े मंत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।
  • भौम प्रदोष पर भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी करें। संभव हो तो हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान शिव और मां पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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