Shiv Ji Ke Mantra (शिव जी के मंत्र): कहते हैं मंत्र जाप में वो शक्ति होती है जिसके माध्यम से किसी भी देवता को शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है। 23 जुलाई को सावन शिवरात्रि है। ये दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस विशेष दिन पर अगर आप कुछ खास मंत्रों का जाप करते हैं तो इससे आपको भगवान शिव की कृपा तो प्राप्त होगी ही साथ ही आपके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। चलिए जानते हैं सावन शिवरात्रि के दिन किन मंत्रों का जाप करना आपके लिए लाभकारी साबित होगा।
शिव बीज मंत्र (Shiv Beej Mantra)
ॐ ह्रीं नम: शिवाय
शिव महामृत्युंजय मंत्र (Shiv Mahamrityunjaya Mantra)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव पंचाक्षर मंत्र (Shiv Panchakshar Mantra)
ॐ नम: शिवाय।
शिव नामावली मंत्र (Shiv Namavali Mantra)
- श्री शिवाय नम:।।
- श्री शंकराय नम:।।
- श्री महेश्वराय नम:।।
- श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
- श्री रुद्राय नम:।।
- ओम पार्वतीपतये नम:।।
- ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।
ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव (Om Namah Parvati Pataye Har Har Mahadev Lyrics)
ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव
शिव रुद्राय मंत्र (Shiv Rudraya Mantra)
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
शिव गायत्री मंत्र (Shiv Gayatri Mantra)
ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।।
रुद्राभिषेक मंत्र (Rudrabhishek Mantra)
ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च
मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति
ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय् ॥
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः ॥
वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः
बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ॥
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।
भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः ॥
नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा ।
भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम: ॥
यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्योsखिलं जगत् ।
निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम् ॥
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात् ॥
सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु । पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम: ॥
विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत् । सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ॥
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