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Vat Purnima 2026 Date: जून में किस दिन पड़ रही पूर्णिमा, नोट कर लें वट पूर्णिमा व्रत की सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 02, 2026 12:54 pm IST,  Updated : Jun 02, 2026 12:54 pm IST

Vat Purnima 2026: व्रत पू्र्णिमा व्रत पति की लंबा आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट पूर्णिमा का महत्व वट सावित्री के बराबर ही होता है। महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा कर, सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती है। जानिए जून में किस दिन रखा जाएगा वट पूर्णिमा का व्रत।

Vat Purnima Vrat 2026- India TV Hindi
वट पूर्णिमा व्रत 2026 डेट Image Source : INDIA TV

Vat Purnima 2026 Date: हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व कई राज्यों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अगर आप भी वट पूर्णिमा व्रत रखने की तैयारी कर रही हैं, तो इसकी सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जान लेना जरूरी है।

कब है वट पूर्णिमा व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को सुबह 03 बजकर 07 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इसका समापन 30 जून को सुबह 05 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर इस साल वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून, सोमवार को रखा जाएगा।

वट सावित्री और वट पूर्णिमा में क्या है अंतर?

वट सावित्री और वट पूर्णिमा व्रत का उद्देश्य और धार्मिक महत्व एक समान होता है, फर्क केवल तिथि का है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाता है, जबकि वट पूर्णिमा का व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किया जाता है। दोनों ही व्रत पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए किए जाते हैं। 

क्या है वट पूर्णिमा का धार्मिक महत्व?

बरगद का वृक्ष बेहद पवित्र माना जाता है। इसमें त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह पर्व खासतौर पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड राज्यों में प्रचलित है। 

ऐसे करें वट पूर्णिमा की पूजा

व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद शुभ रंग के कपड़े पहनें। विवाहित महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा की थाली में फल, फूल, रोली, कुमकुम, दीपक, कच्चा सूत, चना-गुड़ और अन्य पूजन सामग्री रखें। इसके बाद वट वृक्ष के पास जाकर दीप प्रज्वलित करें। पेड़ पर हल्दी और कुमकुम अर्पित करें और चना-गुड़ का भोग लगाएं।

इसके साथ ही हाथ में सूत लेकर 7, 11 या फिर 21 बार परिक्रमा करते हुए वट वृक्ष को सूत लपेटा जाता है। पूजा के दौरान देवी सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ना शुभ माना जाता है। आरती के साथ ही पूजा का समापन किया जाता है। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की जाती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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