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Vijaya Ekadashi 2026 Vrat: 13 फरवरी को विजया एकादशी का व्रत, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और कब होगा पारण

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Feb 03, 2026 03:25 pm IST,  Updated : Feb 03, 2026 03:47 pm IST

Vijaya Ekadashi 2026 Muhurat and Paran Timing: विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। तो आइए यहां जानते हैं विजया एकादशी पूजा मुहूर्त, विधि और पारण के शुभ समय के बारे में।

विजया एकादशी 2026- India TV Hindi
विजया एकादशी 2026 Image Source : FILE IMAGE

Vijaya Ekadashi 2026: फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में इस दिन व्रत रखने के साथ ही विधिपूर्वक पूजा करने से श्री नारायण की विशेष कृपा मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत रखा था। इस व्रत के फल प्रभु राम ने रावण का परास्त किया था। इस साल विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। तो आइए जानते हैं पूजा मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

विजया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी को किया जाएगा।

विजया एकादशी 2026 पारण का समय

एकादशी का पारण का समय सुबह 7 बजकर 7 मिनट से सुबह 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। आपको बता दें कि एकादशी के दिन पारण का खास महत्व होता है। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 4 बजकर 1 मिनट का रहेगा। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अत्यंत जरूरी होता है। द्वादशी तिथि के अंदर पारण न करना पाप करने के समान माना जाता है।

विजया एकादशी पूजा विधि

  • विजया एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे वस्त्र पहन लें। 
  • एकादशी के दिन पीला या नारंगी रंग के कपड़े पहनें। 
  • इसके बाद पूजा घर या मंदिर को साफ कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। 
  • एक चौकी रख उसपर पीले रंग का कपड़ा बिछा दें।
  • चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 
  • फिर घी या तेल का दीया जलाएं और विष्णु जी चंदन का तिलक लगाकर फूल माला अर्पित करें।
  • श्री हरि विष्णु को पंचामृत, पीली मिठाई, गुड़-चना, तुलसी आदि पूजा सामग्री चढ़ाएं।
  • नारायण के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें। देवी लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • विजया एकादशी की कथा सुनें, मंत्रों जा जाप करें। फिर विष्णु जी की आरती करें।

भगवान विष्णु के मंत्र

  • ॐ नमोः नारायणाय॥
  • ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
  • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
  • मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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