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23 जुलाई 2026 का पंचांग: गुरुवार को शुभ योग और विशाखा नक्षत्र का शुभ संयोग, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

 Written By: Acharya Indu Prakash
 Published : Jul 22, 2026 07:31 pm IST,  Updated : Jul 22, 2026 07:39 pm IST

कल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और गुरुवार का दिन है। दशमी तिथि कल पूरा दिन पूरी रात पार करके कल सुबह 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से विस्तार से जानते हैं गुरुवार, 23 जुलाई 2026 का पूरा पंचांग।

23 जुलाई 2026 का पंचांग- India TV Hindi
23 जुलाई 2026 का पंचांग Image Source : INDIA TV

कल, 23 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और गुरुवार का दिन है। दशमी तिथि 23 जुलाई को पूरा दिन पूरी रात पार करके शुक्रवार सुबह 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। कल शाम 7 बजकर 20 मिनट तक शुभ योग रहेगा। साथ ही देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 24 जुलाई को भोर 4 बजकर 28 मिनट पर बुध मिथुन राशि में मार्गी हो रहे हैं। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

23 जुलाई 2026 का पंचांग

  • आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी तिथि- 23 जुलाई 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार करके शुक्रवार सुबह 9 बजकर 13 मिनट तक
  • शुभ योग- 23 जुलाई को शाम 7 बजकर 20 मिनट तक
  • विशाखा नक्षत्र- 23 जुलाई को देर रात 1 बजकर 43 मिनट तक

23 जुलाई 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:45 ए एम से 05:29 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:11 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:48 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:18 पी एम से 07:40 पी एम
  • अमृत काल-  03:56 पी एम से 05:42 पी एम

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 02:10 से दोपहर बाद 03:52 तक
  • मुंबई- दोपहर 02:23 से शाम 04:01 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 02:13 से दोपहर बाद 03:56 तक
  • लखनऊ- दोपहर 01:54 से दोपहर बाद 03:36 तक
  • भोपाल- दोपहर 02:06 से दोपहर बाद 03:46 तक
  • कोलकाता- दोपहर 01:23 से दोपहर बाद 03:02 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 02:25 से शाम 04:05 तक
  • चेन्नई- दोपहर 01:51 से दोपहर बाद 03:27 तक 

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 

सूर्योदय- 05:38 ए एम

सूर्यास्त- 19:18 पी एम

शुभ योग और विशाखा नक्षत्र का संयोग

शुभ योग में किए गए कामों से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वहीं, विशाखा नक्षत्र आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से 16वां नक्षत्र है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसका अर्थ है विभाजित या एक से अधिक शाखाओं वाला। विवाह आदि के समय सजाए गए द्वार को विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर विशाखा नक्षत्र का प्रभाव रहता है।

विशाखा में कारीगरी, चित्रकारी और औषधी से संबंधित कार्य आरंभ करना शुभ होता है। वनस्पतियों में विकंकत के पेड़ से विशाखा नक्षत्र का संबंध है, जो बेर जाति के अंतर्गत आने वाला कंटीला झाड़ीदार वृक्ष है। इसे पिण्डारा के नाम से भी जाना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मे जातकों को इस पेड़ की उपासना करनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि विशाखा नक्षत्र में विकंकत के पेड़ को क्षति नहीं पहुंचानी चाहिए। 

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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