पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि करने की परंपरा है। इस दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी भी पूर्वजों की शांति के लिए विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए पूजा-पाठ और दीपदान से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। परिवार में लंबे समय से परेशानियां बनी हुई हैं, तो आज शाम कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाना चाहिए। चलिए जानते हैं किन जगहों पर दीपदान से पितृ दोष में राहत मिलने की मान्यता है।
आज है इंदिरा एकादशी
पंचांग के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ पितरों के लिए किए जाने वाले धार्मिक कर्मों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। संध्याकाल में दीपदान करना, इस तिथि पर किए जाने वाले प्रमुख उपायों में शामिल है।
पीपल के नीचे जलाएं चौमुखा दीपक
पितृ दोष से राहत के लिए शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की मान्यता है। इसके लिए आटे का चौमुखा दीपक बनाएं। इसमें थोड़ी हल्दी, काले तिल और गुड़ मिलाकर चार बत्तियां लगाएं और तिल के तेल या घी का दीपक पीपल के नीचे जलाएं।
तुलसी के पास रखें दीपक
आज शाम के समय तुलसी जी के पास दीपक जरूर जलाएं। तुलसी को भगवान विष्णु को अतिप्रिय हैं। इससे श्रीहरि की कृपा प्राप्त होने और पितृ शांति के लिए किए गए कर्म के फलित होने की कामना की जाती है।
विष्णु मंदिर में करें दीपदान
आज के दिन मंदिर में जाकर दीपदान करना बहुत शुभ होता है। विष्णु जी के सामने दीपक जलाकर पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। ऐसा करने से नकारात्मकता से राह मिलने और पुण्यफल प्राप्त होने की मान्यता है।
नदी किनारे दीपक जलाएं
किसी पवित्र नदी के तट पर दीपदान करना शुभ माना गया है। गंगा या यमुना जैसी नदियों के किनारे शाम को दीपक जलाकर पितरों की शांति की प्रार्थना करने की मान्यता है। अगर नदी तक जाना संभव न हो, तो घर में जल से भरे कलश के पास दीपक रखकर भी श्रद्धा पूर्वक दीपदान किया जा सकता है।
दान-दक्षिणा
इंदिरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा भी जरूर करें। पीले वस्त्र धारण कर श्रीहरि का ध्यान करें और विष्णु मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना भी शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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