हिंदू धर्म में पंचक को अशुभ दिनों में से एक माना जाता है। हर महीने में 5 दिन ऐसे होते हैं जिन्हें पंचक कहा जाता है। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचक में कोई नया काम भी शुरू नहीं किया जाता है। रक्षाबंधन से पहले यानी 27 अगस्त 2026 से पंचक शुरू हो चुका है। यह पंचक गुरुवार से शुरू हो रहा है इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जाएगा। अग्नि पंचक के दौरान आग, दुर्घटना और मशीनरी से जुड़े कार्यों में विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
इतने बजे से शुरू हुआ पंचक
पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त 2026, गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से पंचक प्रारंभ हो चुका है। पंचक समाप्त 1 सितंबर 2026 को मध्यरात्रि 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। आपको बता दें कि धनिष्ठा से लेकर रेवती तक के पांच नक्षत्रों को पंचक नक्षत्र कहा जाता है। इनके नाम इस तरह है- धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती।
अग्नि पंचक के दौरान भूलकर भी न करें ये काम
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पंचक में लकड़ी से जुड़े कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। तो अग्नि पंचक के दौरान सूखी लकड़ी, घास या ज्वलनशील पदार्थ एकत्र न करें। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।
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पंचक के दौरान चारपाई या पलंग बनवाने की भूल भी न करें। पंचक में चारपाई घर लाना या बनवाना अशुभ माना गया है।
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पंचक में घर की छत ढलवाना भी वर्जित होता है। ऐसे पंचक काल में मकान की छत ढलवाना (लेंटर डालना) या नया निर्माण कार्य शुरू न करें।
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अग्नि पंचक में आग, बिजली के उपकरणों, भारी मशीनों या औजारों से जुड़ा नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि दुर्घटना की आशंका रहती है।
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पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा करने से भी बचना चाहिए। इस दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
पंचक के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
- हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। पंचक के दौरान हनुमान जी की पूजा करना फलदायी होता है।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। मंत्र है- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- रोजाना सुबह के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और रोली डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- पंचक के दौरान गरीब और जरूरतमदों को अन्न, धन और अन्य जरूरी चीजों का दान करें। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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