अहोई अष्टमी का व्रत दीपावली से ठीक 8 दिन पहले कृष्ण पक्ष अष्टमी को किया जाता है। यह व्रत माता अहोई अथवा देवी अहोई को समर्पित है। इस दिन माताएं संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना के लिए व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं। वहीं अहोई अष्टमी का व्रत करने से निःसंतान दंपतियों को संतान का सुख मिलता है। अहोई अष्टमी के दिन को अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि पर किया जाता है जो चंद्र माह का आठवां दिन होता है।
पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद व्रती महिलाओं शाम के समय तारों का दर्शन होने के बाद पारण करती हैं। कुछ क्षेत्र में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन अहोई माता की पूजा-अर्चना करने के साथ ही इन खास मंत्रों का जाप करने से संतान को हर सुख, खुशी और सफलता प्राप्त होती है।
अहोई अष्टमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप
अहोई अष्टमी के दिन जो भी इस मंत्र का भक्ति और श्रद्धा के भाव से जाप करता है देवी मां उसकी हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। इसके साथ ही उनके संतान के जीवन में खूब खुशहाली आती है।
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'ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः'
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अहोई माता नमः
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नमो नमस्ते मातायै, शिवायै सततं नमः। आराध्यः प्रदात्री च, पुत्राणां सततम् सुलभम्।
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पूतना को हरै जो, बालकों की रक्षा करै। माता अहोई नमस्तुभ्यं, मम पुत्रां रक्ष सर्वदा।
अहोई अष्टमी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की बेटी ने दिवाली से पहले जंगल में मिट्टी खोदते समय अनजाने में स्याहू (साही) के बच्चे को खुरपी से घायल कर दिया था, जिससे उसकी मृत्यु हो गई थी। गुस्से में आकर स्याहू ने उसकी कोख बांधने का शाप दे दिया। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से विनती की कि वो उसकी जगह अपनी कोख बंधवा लें। ननंद की विनती पर सबसे छोटी भाभी ने खुद पर यह संकट ले लिया। साही के श्राप के कारण छोटी भाभी की जो भी संतान होती, वह सात दिन के भीतर मर जाती। दुखी होकर उसने एक पंडित जी से उपाय पूछा। पंडित जी के मार्गदर्शन पर उसने पूरी निष्ठा से सुरही गाय और बाद में साही की सेवा की। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर साही ने उसे सातों पुत्रों और बहुओं का आशीर्वाद दिया। तभी से कार्तिक कृष्ण अष्टमी पर अहोई माता (देवी पार्वती) और स्याहू का पूजन कर संतान की लंबी उम्र और रक्षा के लिए यह व्रत रखा जाने लगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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