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Ahoi Ashtami 2026 Tare Nikalne Ka Time: अहोई अष्टमी पर कब दिखेंगे तारे? जानिए तारों को अर्घ्य देने का सही समय और पूजा की विधि

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Nov 01, 2026 09:29 am IST,  Updated : Nov 01, 2026 09:29 am IST

Ahoi Ashtami 2026 Taare Nikalne Ka Time: अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं तारे निकलने तक रखती हैं। ऐसे में हर महिला को इस दिन तारे निकलने का इंतजार रहता है। चलिए आपको बताते हैं अहोई अष्टमी पर तारे किस समय निकलेंगे।

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अहोई अष्टमी पर तारे निकलने का समय 2026 Image Source : CANVA

अहोई अष्टमी का पावन पर्व इस साल 1 नवंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं संतानों के सुखी जीवन और लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत का पारण तारों को अर्घ्य देकर किया जाता है। ऐसे में व्रती महिलाएं शाम की पूजा के बाद से ही तारे निकलने का इंतजार करने लगती हैं। जानिए इस साल अहोई अष्टमी पर तारे कब उगेंगे और तारों को अर्घ्य देने की विधि क्या है। यहां आप जानेंगे अहोई अष्टमी पर तारे निकलने का सही समय शहर अनुसार।

अहोई अष्टमी पर तारे उगने का समय 2026

पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी पर तारे निकलने और उन्हें अर्घ्य देने का मुख्य समय शाम 6 बजे के आसपास का है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में इसमें थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है। आइए जानते हैं कि आपके शहर में तारे उगने का सटीक समय क्या रहेगा।

अहोई अष्टमी (1 नवंबर 2026) पर तारे निकलने का समय शहर अनुसार

  • नई दिल्ली - 06:00 PM
  • नोएडा -  06:00 PM
  • लखनऊ -  05:48 PM
  • कोलकाता -  05:22 PM
  • चेन्नई - 06:04 PM
  • हैदराबाद -  06:07 PM
  • अहमदाबाद -  06:25 PM
  • सूरत -  06:26 PM
  • पुणे -  06:24 PM
  • जयपुर -  06:08 PM
  • चंडीगढ़ -  06:00 PM
  • भोपाल - 06:05 PM
  • मथुरा -  06:00 PM
  • वृंदावन -  06:00 PM
  • आगरा - 05:59 PM
  • वाराणसी - 05:41 PM
  • गाजियाबाद - 06:00 PM
  • मुंबई - 06:28 PM

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने की विधि

  • अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने के लिए एक थाली में करवा या कलश रखें।
  • उसमें जल भर कर थोड़े से अक्षत और फूल डाल लें।
  •  शाम को जब आकाश में तारे दिखाई दें तब तारों की तरफ देखते हुए दोनों हाथों से धीरे-धीरे जल अर्पित करें।
  • अर्घ्य देते समय अहोई माता से अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
  • अर्घ्य देने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर तीन परिक्रमा करें।
  • इसके बाद अपना व्रत खोल लें।
  • अगर आप चांद को अर्घ्य देकर यह व्रत खोलती हैं तो चंद्रोदय होने के बाद भी इसी विधि से चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपन व्रत खोलें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

 

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