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भोग लगाने के बाद घंटों छोड़ देते हैं? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए प्रसाद उठाने का सही समय

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 09, 2026 08:17 am IST,  Updated : Sep 09, 2026 08:17 am IST

भगवान को भोग लगाने के बाद उसे घंटों या रातभर पूजा स्थल पर छोड़ना सही नहीं माना जाता। जानिए भोग को कितने समय बाद भगवान के सामने रखने के बाद प्रसाद के रूप में उठा लेना चाहिए। साथ ही जानिए कि भोग का पात्र, कहां रखें और भोग के बाद क्या करें।

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भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाएं? Image Source : PINTEREST

सनातन धर्म में पूजा के दौरान भगवान को भोग अर्पित करने की परंपरा है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को भोग लगाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोग लगाने के बाद उसे पूजा स्थल पर लंबे समय तक छोड़ना उचित नहीं माना जाता? भोग लगाने से लेकर उसे उठाने और बांटने तक के कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। चलिए जानते हैं भोग और प्रसाद के क्या नियम बताए गए हैं।

इतने समय रखें भोग

मान्यताओं के अनुसार, भगवान को भोग लगाने के बाद उसे तुरंत नहीं उठाना चाहिए। भोग को कम से कम 5 मिनट तक भगवान के सामने रखने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद करीब 15 से 20 मिनट के भीतर भोग को उठा लेना चाहिए। इसके बाद इस प्रसाद को परिवार के लोगों में बांटा दें।

पूजा घर में लंबे समय तक छोड़ना ठीक नहीं

कई लोग पूजा या आरती के बाद भगवान को लगाया गया भोग वहीं छोड़ देते हैं और कई बार उसे रातभर भी नहीं उठाते। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भोग को बहुत देर तक पूजा स्थल पर छोड़ने से उसकी पवित्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए भोग को सही समय पर उठाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।

जमीन पर न रखें

भगवान को अर्पित किया जाने वाला भोग सीधे जमीन या फर्श पर न रखें। इसके लिए साफ थाली, पूजा की चौकी या किसी स्टैंड का इस्तेमाल करें। वहीं, भोग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पात्र को लेकर भी कुछ मान्यताएं हैं। परंपरागत रूप से कांसा, पीतल, तांबा, चांदी और सोने के पात्रों को भोग के लिए उपयुक्त माना गया है। वहीं प्लास्टिक, कांच और एल्यूमिनियम के बर्तनों में भगवान को भोग न लगाएं। 

इन बातों का भी रखें ध्यान

भोग अर्पित करते समय भोजन को ढककर रखने की परंपरा भी है। इसके साथ भगवान के सामने जल रखने की बात कही जाती है। कई घरों और मंदिरों में भोग के समय कुछ देर के लिए पूजा स्थल का पर्दा भी कर दिया जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान को एकांत में भोग अर्पित करने की परंपरा पूरी होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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