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श्राद्ध और पूजन में किस तरह के ब्राह्मण का चयन करना माना गया है श्रेष्ठ? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये नियम

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 09, 2026 06:29 pm IST,  Updated : Oct 09, 2026 06:59 pm IST

गरुड़ पुराण में श्राद्ध और यज्ञ के लिए ब्राह्मण के चयन से जुड़े विशेष नियम बताए गए हैं। इसमें सदाचारी और वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण के गुणों के साथ कुछ ऐसी श्रेणियों का भी उल्लेख है, जिनका धार्मिक अनुष्ठानों में वरण नहीं करने की बात कही गई है।

garud puran, गरुड़ पुराण- India TV Hindi
श्राद्ध और पूजन में कैसे ब्राह्मण का करें चयन Image Source : PINTEREST

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के दौरान ब्राह्मण का वरण करना सनातन धर्म की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि श्राद्ध, यज्ञ और पूजन के लिए ब्राह्मण का चयन करते समय उसके आचरण, विद्वत्ता और धार्मिक कर्मों के ज्ञान को ध्यान में रखना चाहिए। इस ग्रंथ में कुछ विशेष गुणों वाले ब्राह्मणों को वरण के योग्य बताया गया है। तो चलिए जानते हैं श्राद्ध और पूजन कार्यों में कैसे ब्राह्मण का चयन करना श्रेष्ठ माना गया है। 

सदाचारी ब्राह्मण का करें वरण

गरुड़ पुराण के अनुसार, श्राद्ध और पूजन के लिए ऐसे ब्राह्मण का चयन करना श्रेष्ठ माना गया है, जो सदाचारी, सत्य बोलने वाला और वेदों का अध्ययन करने वाला हो। उसे वेदों और कर्मकांडों का ज्ञान होना चाहिए। इसके साथ ही वह परोपकार करने वाला, शास्त्रों का ज्ञाता, गायत्री मंत्र का जप करने वाला और तपस्या में लीन रहने वाला हो। धर्मशास्त्रों की जानकारी रखने वाले और पुण्य-पाप के अंतर को समझने वाले ब्राह्मण को भी श्राद्ध और यज्ञ के लिए योग्य बताया गया है।

इन ब्राह्मणों का वरण न करें

ग्रंथ में ज्योतिषी, अभिचार कर्म करने वाले और कुछ विशेष श्रेणियों के ब्राह्मणों का श्राद्ध, यज्ञ और महादान में वरण नहीं करने की बात कही गई है। दिए गए पाठ के अनुसार, ऐसा करने पर श्राद्ध और यज्ञ का फल निष्फल होने की मान्यता बताई गई है।

चार प्रकार के ब्राह्मणों का चयन वर्जित

गरुड़ पुराण में भेड़-बकरी पालने वाले, चित्रकार, वैद्य और ज्योतिषी को चार ऐसी श्रेणियों में गिनाया गया है, जिन्हें विद्वान होने पर भी यज्ञ आदि में पूजन के योग्य नहीं माना गया है। इसके अलावा पाठ में मथुरा निवासी, कपटी और गयाप्रदेश यानी बिहार तथा आनंद देश में उत्पन्न होने वाले ब्राह्मणों का भी उल्लेख किया गया है, जिनका श्राद्ध और यज्ञ में वरण वर्जित बताया गया है।

किन लोगों को बताया गया है त्याज्य

पाठ में काना, कोढ़ी, मूर्ख, क्रोधी, वर्णशंकर, काले दांतों वाला, निंदित, पतित, नपुंसक, अवेद यानी वेदों का अध्ययन न करने वाला और अंगहीन व्यक्ति का भी उल्लेख है। इसके साथ ही कुदेश का निवासी, देखने में भयानक लगने वाला तथा मगध देश का निवासी और अत्यधिक काले रंग वाला व्यक्ति भी उन श्रेणियों में गिनाया गया है, जिन्हें यज्ञ, जप और श्राद्ध जैसे कार्यों में त्याज्य (वर्जित) बताया गया है।

तिलक को लेकर भी मिलता है उल्लेख

दिए गए पाठ में यह भी कहा गया है कि यदि कोई ब्राह्मण स्नान करने के बाद अपने माथे पर तिलक नहीं लगाता, तो उसे प्रणाम नहीं करना चाहिए। इस प्रकार गरुड़ पुराण के इन अंशों में श्राद्ध और पूजन के लिए ब्राह्मण के चयन से जुड़े आचरण, विद्वत्ता और धार्मिक परंपराओं के नियमों का उल्लेख मिलता है।

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