Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि का त्यौहार देवी दुर्गा को समर्पित है। इस दौरान माता रानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि में मां अंबे की उपासना करना अत्यंत ही फलदायी माना जाता है। पूरे साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती हैं , जिसमें दो गुप्त नवरात्र होते हैं। गुप्त नवरात्रि तंत्र विद्या और साधना के लिए जानी जाती है, इसलिए गृहस्थ लोगों के लिए शारदीय और चैत्र नवरात्रि अधिक महत्व रखती है। अभी चैत्र नवरात्रि चल रहे हैं, जिसका समापन 27 मार्च को राम नवमी के साथ होगा। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा को क्या-क्या नहीं चढ़ाना चाहिए।
नवरात्रि में माता रानी को न चढ़ाएं ये फल
नवरात्रि में देवी मां को फलों का भोग लगाना अच्छा माना जाता है। लेकिन माता रानी को ये फल भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए। मां दुर्गा को नाशपाती, सूखे नारियल, अंजीर, अनानास नहीं अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा देवी मां को खट्टे फल और नींबू, इमली भी नहीं चढ़ाएं। नवरात्रि की पूजा में कीड़े लगे हुए फल, अधिक खट्टे और कड़वे फल, कटे-फटे या पक्षी के जूठे फल भी न रखें।
देवी को नहीं चढ़ाएं ये फूल
नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी को ताजे और सुगंधित फूल चढ़ाएं। वहीं केतकी, कनेर, तुलसी, नागकेसर, धतूरा, मदार और मुरझाए हुए फूल माता रानी की पूजा में गलती से भी न रखें। ये सभी देवी मां को नहीं चढ़ाना चाहिए।
देवी मां को भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- देवी मां का भोग बनाते समय शुद्धता और साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।
- माता रानी को भोग लगाने के लिए तांबा, पीतल और मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करें। कांच और प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल भोग के लिए नहीं करना चाहिए।
- मां दुर्गा के लिए भोग बनाते समय ध्यान रखें कि उसमें नमक और लहसुन-प्याज का स्पर्श न हो।
- भोग के लिए सभी सामग्री ताजी और सात्विक होनी चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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