Daridra Dahan Shiv Stotra: आज, 13 जन को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। महादेव और मां पार्वती को समर्पित यह उपवास हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। ज्येष्ठ माह में इस साल मासिक शिवरात्रि अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। अगर आप लंबे समय से कर्ज या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं तो यह आपके लिए अच्छा अवसर हो सकता है। मान्यता है कि इस शुभ दिन पर आप विशेष शिव स्तोत्र का पाठ करके आर्थिक दिक्कतों से छुटकारा पा सकते हैं। यहां पढ़िए संपूर्ण दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र और इससे जुड़े जरूरी नियम।
शुभ संयोग में करें दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र
मासिक शिवरात्रि पर करीब 27 साल बाद महासंयोग बना है। चतुर्दशी तिथि 13 जून को शाम 4 बजकर 8 मिनट से 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस दिन भोलेनाथ की पूजा करके उनकी विशेष कृपा पाने से बिल्कुल भी न चूकें। पौराणिक शास्त्रों में 'दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र' का उल्लेख मिलता है। शिव जी को समर्पित इस स्तोत्र में कुल 9 श्लोक हैं। माना जाता है कि नियमों को ध्यान में रखते हुए इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को कभी पैसों की तंगी नहीं होती।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र पाठ के नियम
- धर्म शास्त्रों के अनुसार, व्यक्ति को जल्दबाजी में या फिर केवल किसी के कहने पर दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का पाठ नहीं करना चाहिए।
- इस स्तोत्र का पाठ करते समय मन को शांत रखना चाहिए।
- दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र के शब्दों का गलत उच्चारण नहीं करना चाहिए।
- मान्यता है कि दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का पाठ बीच में गलती से भी नहीं छूटना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति महापाप का भागी बन सकता है।
- लगातार 40 दिन तक सुबह-शाम 108 बार इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे शिव जी की कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र (Daridra Dahan Shiv Stotra)
विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय, कणामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय, कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय।
गंगाधराय गजराजविमर्दनाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय, उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय, भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
मंझीरपादयुगलाय जटाधराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय, हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय, कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय, नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय, गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय, दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणं। सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्।
त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्॥
॥ इति वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥
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