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Dussehra Katha 2: रावण को मोक्ष मिला था या नहीं? क्या पहले से ही निश्चित थी भगवान राम के हाथों उसकी मृत्यु

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Sep 29, 2025 01:49 pm IST,  Updated : Oct 01, 2025 06:28 am IST

Dussehra Katha 2: भारत में दशहरा का त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। लेकिन एक सवाल हर किसी के मन में रहता है कि क्या रावण को मोक्ष मिला था या नहीं। तो चलिए आपको बताते हैं कि रावण को मोक्ष कैसे मिला था।

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रावण को मोक्ष क्यों नहीं मिला? Image Source : FREEPIK

Dussehra Katha 2: दशहरा का पर्व इस साल 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस पर्व के आने से पहले ही लोगों के मन में रावण को लेकर तरह-तरह के सवाल आने लगते हैं। जिसमें से एक सवाल है कि क्या रावण को मोक्ष मिल गया था? इन दिनों इंटरनेट पर इस सवाल के जवाब के बारे में काफी खोजा जा रहा है। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि रावण को मोक्ष मिल गया था क्योंकि उसकी मृत्यु भगवान राम के हाथों हुई थी। तो कुछ का मानना है कि रावण को अगले जन्म में जाकर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। चलिए आपको बताते हैं रावण के मोक्ष को लेकर कौन-कौन सी कथाएं प्रचलित हैं?

रावण को मोक्ष क्यों मिला था?

कई पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में यह माना जाता है कि रावण को मोक्ष प्राप्त हुआ था क्योंकि उसका वध स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम जी ने किया था। एक मान्यता अनुसार रावण ने जानबूझकर भगवान राम से शत्रुता मोल ली थी क्योंकि वह जानता था कि भगवान के हाथों मृत्यु पाने से ही उसे मोक्ष मिल सकता है। श्रीरामचरितमानस के लंका कांड में एक दोहे में कहा गया है कि भगवान राम जैसा दीनों का हितकारी कौन है, जिन्होंने सारे राक्षसों को मुक्त कर दिया। दुष्ट रावण ने भी वह गति पाई जिसे श्रेष्ठ मुनि भी कठिनाई से प्राप्त करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि रावण को मोक्ष की प्राप्ति हो गई थी।

रावण को मोक्ष क्यों नहीं मिला था?

कुछ अन्य व्याख्याएं रावण को मोक्ष प्राप्त होने की बात का खंडन करती हैं। कहा जाता है कि रावण पूर्व जन्म में भगवान विष्णु का द्वारपाल जय था। कथा के अनुसार जय और विजय को तीन जन्मों तक राक्षस योनि में रहने का श्राप मिला था। इसी श्राप के कारण इन दोनों का पहला जन्म हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप के रूप में हुए। दूसरा रावण और कुंभकर्ण के रूप में तो तीसरा जन्म शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में हुआ। इन तीनों ही जन्मों में उन दोनों का वध भगवान विष्णु के किसी न किसी अवतार द्वारा ही हुआ। इस कथा के अनुसार अगर रावण को दूसरे जन्म में ही मोक्ष मिल जाता, तो उसे तीसरा जन्म लेने की आवश्यकता ही नहीं होती। ऐसे में जय-विजय के इन तीन जन्मों के चक्र को मानने वाले विद्वानों के अनुसार रावण को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हुई थी। ऐसे में जय-विजय को मोक्ष की प्राप्ति के लिए अगला जन्म लेना पड़ा था। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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