सनातन धर्म में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए कई लोग अपने घर में शिवलिंग स्थापित करके उसकी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में घर में शिवलिंग रखने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है। आप घर में कहीं भी शिवलिंग स्थापित नहीं कर सकते, इसकी एक निश्चित दिशा होती है। शिवलिंग को इस तरह से स्थापित किया जाता है, जिससे जलाधारी का रुख हमेशा सही दिशा की तरफ रहे। चलिए जानते हैं घर के मंदिर में शिवलिंग किस दिशा में रखना चाहिए और जलाधारी किस तरफ रहनी चाहिए।
घर में किस दिशा में होना चाहिए शिवलिंग?
शास्त्रों और पुराणों अनुसार, घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करने की सबसे शुभ दिशा उत्तर-पूर्व दिशा मानी जाती है। जिसे ईशान कोण के नाम से भी जाना जाता है। ईशान कोण को देवी-देवताओं का स्थान कहा गया है, इसलिए इस दिशा में शिवलिंग स्थापित करना चाहिए। यदि ईशान कोण में जगह न हो, तो इस स्थिति में आप शिवलिंग को उत्तर या पूर्व दिशा में भी स्थापित कर सकते हैं।
किस तरफ होनी चाहिए जलाधारी?
जलाधारी शिवलिंग का वह हिस्सा होता है, जहां से अर्घ्य का जल बहकर नीचे गिरता है। शास्त्रों अनुसार शिवलिंग की जलाधारी का रुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि इस दिशा में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। कहते हैं उत्तर दिशा से निकलने वाला जल घर में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
पूजा करते समय हमारा मुख किस दिशा में होना चाहिए?
शिवलिंग की पूजा या जलाभिषेक करते समय हमारा मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा में बैठकर पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ध्यान रहे कि कभी भी दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
घर में शिवलिंग रखने के जरूरी नियम
- घर में शिवलिंग स्थापित किया है तो प्रतिदिन उसकी पूजा करें और उस पर जल भी जरूर चढ़ाएं।
- इस बात का ध्यान रखें कि घर के अंदर रखे गए शिवलिंग का आकार हाथ के अंगूठे के बराबर या उससे कम होना चाहिए।
- घर के मंदिर के लिए नर्मदेश्वर या पारद शिवलिंग रखना सबसे उत्तम माना जाता है।
- शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग करें।
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