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Jai Ambe Gauri Lyrics PDF: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी...नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा जी की आरती, देखें लिरिक्स

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Sep 22, 2025 10:46 am IST,  Updated : Sep 22, 2025 07:12 pm IST

Jai Ambe Gauri Lyrics In Hindi PDF: नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है ऐसे में इस दौरान मां दुर्गा की आरती जरूर करनी चाहिए। कहते हैं जो भी भक्त नवरात्रि में दुर्गा जी की 'जय अम्बे गौरी' आरती करता है उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।

durga ji ki aarti- India TV Hindi
दुर्गा जी की आरती Image Source : INDIA TV

Jai Ambe Gauri Lyrics In Hindi PDF: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी…माता रानी की आरती के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। भक्त नवरात्रि के हर दिन सुबह-शाम दुर्गा जी की आरती जरूर करते हैं। कहते हैं जो सच्चे मन से माता की आरती करता है उसके जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही माता की कृपा शीघ्रता से प्राप्त होती है। चलिए आपको बताते हैं दुर्गा जी की आरती के लिरिक्स।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri)

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत,

टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना,

चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर,

रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला,

कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत,

खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत,

तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित,

नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर,

सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे,

महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना,

निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,

शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे,

सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी,

तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी,

तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,

नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा,

अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता,

तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता ।

सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित,

वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]

मनवांछित फल पावत,

सेवत नर नारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत,

अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत,

कोटि रतन ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति,

जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी,

सुख-संपति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics PDF Download

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