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क्या मासूम बच्चों पर भी पड़ता है साढ़े साती और ग्रह दोष का असर? जानिए किस उम्र से शुरू होता है ग्रहों का प्रभाव

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 14, 2026 11:31 am IST,  Updated : Aug 14, 2026 11:38 am IST

जब भी जीवन में परेशानी आती है तो ज्यादातर लोग किसी ज्योतिषाचार्य को अपनी कुंडली दिखाकर उस समस्या का उपाय जरूर पूछते हैं। ऐसा लोग अमूमन अपने बच्चों के मामले में भी करते हैं। लेकिन क्या छोटे बच्चों पर भी ग्रह दोषों का प्रभाव पड़ता है? यहां हम इसी बारे में आपको बताएंगे।

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ग्रह दोष का प्रभाव किस उम्र में पड़ना शुरू होता है? Image Source : INDIA TV

ग्रह दोष का असर किस उम्र से शुरू होता है? क्या बच्चों पर साढ़े साती या किसी अन्य महादशा का बुरा प्रभाव पड़ता है? ये ऐसे सवाल हैं जो हर माता-पिता के मन में कभी न कभी जरूर आते हैं। अमूमन ऐसा तब होता है जब किसी राशि पर साढ़े साती चल रही हो और अगर किसी के बच्चे की भी वही राशि है, तब माता-पिता सोचने लगते हैं कि हमारे बच्चे पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन ज्योतिष की मानें तो बच्चों पर उनके ग्रह दोषों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। एक उम्र तक बच्चे के जीवन में जो कुछ घटित होता है उस पर उसके माता-पिता के ग्रहों का असर रहता है, न कि उसके खुद के ग्रहों का। चलिए जानते हैं इस बारे में प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी क्या कहते हैं।

क्या मासूम बच्चों पर भी पड़ता है साढ़े साती और ग्रह दोष का असर?

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करके बताया है कि ग्रह दोष का असर किस उम्र से शुरू होता है। महाराज जी कहते हैं कि अगर कोई आपसे कहे कि आपके बच्चे के राहु-केतु खराब हैं और उस समय आपके बच्चे की उम्र सिर्फ 5 साल है तो उसकी बातों को इग्नोर कर देना। ग्रह स्थिति तो आती जाती रहती है, लेकिन अगर आपका बच्चा 16 साल से छोटा है तो कोई ग्रह उस पर असर नहीं करेगा। 12 साल तक तो बच्चा अपने कर्मों का जिम्मेदार ही नहीं होता। इस उम्र तक वो जो भी कर्म करता है उसके जिम्मेदार उसके मां-बाप होते हैं।

आगे महाराज जी कहते हैं कि 12 साल तक बच्चा जो भी कर्म करेगा उसका फल मां-बाप को भोगना होगा। इसलिए हर माता-पिता को अपने बच्चों से अच्छे कर्म कराने चाहिए। उनसें हनुमान चालीसा का पाठ कराना चाहिए। शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम अपने बच्चों को याद कराएं और हर दिन इन नामों का जाप कराएं। इससे उसका जीवन सुखमय रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?

ज्योतिष शास्त्र अनुसार, जन्म से लेकर 12 साल तक की आयु तक बच्चे पर मुख्यतः उसके मां-बाप के कर्मों और ग्रहों का प्रभाव रहता है। दरअसल इस उम्र तक बच्चे का अपना कोई संचित कर्म नहीं होता। ऐसे में अगर इस दौरान बच्चा बीमार रहता है या उसे कोई भी कष्ट होता है, तो इसका कारण मुख्य रूप से उसके मां-बाप के कर्म और ग्रह ही होते हैं।

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