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Maha Shivratri Special: महाशिवरात्रि पर मंत्र होते हैं कीलक मुक्त, शीघ्र फलों की होती है प्राप्ति, पूरी होती है हर मनोकामना

Written By: Vineeta Mandal Published : Feb 14, 2026 11:12 pm IST, Updated : Feb 14, 2026 11:12 pm IST

Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन सभी शक्तिशाली मंत्र कीलक मुक्त होते हैं। इस दिन मंत्रों का जाप करने से शीघ्र फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि शिवरात्रि के दिन मंत्र कीलक मुक्ति क्यों होते हैं।

महाशिवरात्रि 2026- India TV Hindi
Image Source : FILE IMAGE महाशिवरात्रि 2026

Maha Shivratri Special: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा की जाती है। शिवरात्रि के दिन व्रत और पूजा करने से शिव-शक्ति दोनों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आज के दिन जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से महादेव की भक्ति करता है उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। आपको बता दें महाशिवरात्रि के दिन सभी मंत्र कीलक मुक्त होते हैं यानी कि इस दिन जो भी मंत्र का जाप आप करेंगे उसका आपको शीघ्र फल प्राप्त होगा। तो आइए जानते हैं कि आखिर ये कीलक होता है क्या और इसका महादेव से क्या संबंध है।

कीलक सिद्धांत

मान्यताओं के अनुसार, कीलक का सिद्धांत मुख्य रूप से श्री दुर्गा सप्तशती से जुड़ा हुआ है, जो तंत्र-मंत्र शास्त्र और देवी उपासना का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव ने ही दुर्गा सप्तशती के मंत्रों को कीलित कर दिया था। कीलक स्तोत्र पढ़ने से यह कील हटता। जब यह कीलक मुक्त होता है तभी दुर्गा सप्तशती का पूरा फल प्राप्त होता है। कीलक शब्द का अर्थ होता है- (किसी चीज को बांधना, गुप्त करना, प्रभाव को रोकना या नष्ट करना)। कीलक का सिद्धांत यह है कि कई शक्तिशाली मंत्र/स्तोत्रों को प्राचीन काल में भगवान शिव ने कीलित कर दिया था ताकि अयोग्य व्यक्ति उनके दुरुपयोग से संसार को हानि न पहुंचाएं। इसे कीलक मुक्त करने के लिए विशेष कीलक स्तोत्र या विधि का उपयोग किया जाता है। भगवान शिव ने कई (खासकर तांत्रिक बीज मंत्रों या शक्तिशाली देवी मंत्रों जैसे दुर्गा सप्तशती के) को कीलित किया, जिससे उनकी पूर्ण सिद्धि के लिए उत्कीलन (कीलक मुक्त करने की विधि) जरूरी हो जाती है।

महाशिवरात्रि पर मंत्र होते हैं कीलक मुक्त

महाशिवरात्रि के दिन रात्रि पूजा का खास महत्व होता है। महाशिवरात्रि के रात्रि में शिव और शक्ति का दिव्य मिलन माना जाता है। यह रात्रि अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और सिद्धि वाली होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन रात्रि में जप, तप, ध्यान करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव अपने भक्तों पर अधिक कृपालु होते हैं और उनके प्रभाव से कई कीलित मंत्र स्वतः मुक्त हो जाते हैं। खासकर शिव से संबंधित मंत्र जैसे ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शीघ्र मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। शिवरात्रि के दिन शिव की कृपा से कीलन का प्रभाव कमजोर पड़ जाता है या नष्ट हो जाता है। इस रात्रि में भगवान शिव की विशेष कृपा और असीम ऊर्जा होती है, जो साधना की बाधाओं को दूर कर देती है और मंत्र को शीघ्र प्रभावी बना देती है।

कीलक स्तोत्र पाठ

ॐ अस्य श्री कीलक स्तोत्र महामंत्रस्य। शिव ऋषि:। अनुष्टुप् छन्द:। महासरस्वती देवता। मंत्रोदित देव्यो बीजम्।

नवार्णो मंत्रशक्ति। श्री सप्तशती मंत्र स्तत्वं स्री जगदम्बा प्रीत्यर्थे सप्तशती पाठाङ्गत्वएन जपे विनियोग:।
 
ॐ नमश्चण्डिकायै
 
मार्कण्डेय उवाच-
 
ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे।

श्रेयःप्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्धधारिणे।।1।।
सर्वमेतद्विजानीयान्मंत्राणामभिकीलकम्।

सोऽपि क्षेममवाप्नोति सततं जप्यतत्परः।।2।।

सिद्ध्यन्त्युच्चाटनादीनि वस्तूनि सकलान्यपि।
एतेन स्तुवतां देवीं स्तोत्रमात्रेण सिद्धयति।।3।।
 
न मंत्रो नौषधं तत्र न किञ्चिदपि विद्यते।
विना जाप्येन सिद्ध्येत सर्वमुच्चाटनादिकम्।।4।।
 
समग्राण्यपि सिद्धयन्ति लोकशङ्कामिमां हरः।
कृत्वा निमंत्रयामास सर्वमेवमिदं शुभम्।।5।।
 
स्तोत्रं वै चण्डिकायास्तु तच्च गुप्तं चकार सः।
समाप्तिर्न च पुण्यस्य तां यथावन्निमंत्रणाम्।।6।।
 
सोऽपि क्षेममवाप्नोति सर्वमेव न संशयः।
कृष्णायां वा चतुर्दश्यामष्टम्यां वा समाहितः।।7।।
 
ददाति प्रतिगृह्णाति नान्यथैषा प्रसीदति।
इत्थं रूपेण कीलेन महादेवेन कीलितम्।।8।।
 
यो निष्कीलां विधायैनां नित्यं जपति संस्फुटम्।
स सिद्धः स गणः सोऽपि गन्धर्वो जायते नरः।।9।।
 
न चैवाप्यटतस्तस्य भयं क्वापीह जायते।
नापमृत्युवशं याति मृतो मोक्षमवाप्नुयात्।।10।।
 
ज्ञात्वा प्रारभ्य कुर्वीत न कुर्वाणो विनश्यति।
ततो ज्ञात्वैव सम्पन्नमिदं प्रारभ्यते बुधैः।।11।।
 
सौभाग्यादि च यत्किञ्चिद् दृश्यते ललनाजने।
तत्सर्वं तत्प्रसादेन तेन जप्यमिदम् शुभम्।।12।।
 
शनैस्तु जप्यमानेऽस्मिन् स्तोत्रे सम्पत्तिरुच्चकैः।
भवत्येव समग्रापि ततः प्रारभ्यमेव तत्।।13।।

ऐश्वर्यं तत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।
शत्रुहानिः परो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः।।14।।

।।इति श्रीभगवत्याः कीलकस्तोत्रं समाप्तम्।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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