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Kanya Pujan: अष्टमी और नवमी पर कैसे करें कन्या पूजन? नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और स्टेप-बाय-स्टेप पूरी विधि

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 17, 2026 01:28 pm IST,  Updated : Oct 17, 2026 01:28 pm IST

नवरात्रि का पर्व कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पूजन कैसे किया जाता है, इसका सही तरीका क्या है और इसमें किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है? यहां हम आपको कंजक पूजन से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण बात बताने जा रहे हैं।

kanya pujan- India TV Hindi
कन्या पूजन की संपूर्ण विधि Image Source : INDIA TV

Kanya Pujan Vidhi: कन्या पूजन नवरात्रि पर्व का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे अधिकांश लोग नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर संपन्न करते हैं। इस पूजन में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को घर पर आमंत्रित कर उन्हें माता रानी के नौ स्वरूपों के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अब सवाल यह उठता है कि कन्या पूजन किस दिन करना चाहिए? तो आपको बता दें कि आपके कुल की परंपरा के अनुसार जिस भी दिन कन्या पूजन किया जाता है, आप उसी दिन यह अनुष्ठान पूरा करें। उदाहरण के लिए, कई परिवारों में अष्टमी तिथि पर यह शुभ कार्य किया जाता है, तो कुछ परिवारों में नवमी तिथि पर। चलिए अब विस्तार से जानते हैं कि कन्या पूजन कैसे किया जाता है और इसकी पूरी विधि क्या है...

कन्या पूजन 2026 डेट और मुहूर्त

आप अपनी परंपरा के अनुसार 18 या 19 अक्टूबर में से किसी भी दिन कन्या पूजन कर सकते हैं। चूंकि अष्टमी तिथि 18 और 19 दोनों दिन व्याप्त रहेगी और नवमी तिथि 19 अक्टूबर को है, इसलिए यदि आपके यहां अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने का विधान है, तो आप इसे 18 या 19 दोनों में से किसी भी दिन सुविधानुसार संपन्न कर सकते हैं। वहीं नवमी वाले तो कन्या पूजन 19 अक्टूबर को ही करेंगे। कन्या पूजन के लिए सुबह 6 से 10 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जाता है।

कन्या पूजन सामग्री 

  • साफ जल: कन्याओं के चरण धोने के लिए
  • आसन: कन्याओं और बालक को आदरपूर्वक बिठाने के लिए
  • रोली/कुमकुम: कन्याओं का तिलक करने के लिए
  • अक्षत: माथे पर तिलक के साथ लगाने के लिए
  • साफ कपड़ा या तौलिया: कन्याओं के पैर पोंछने के लिए
  • कलावा: कन्याओं और बटुक के हाथ में रक्षा सूत्र बांधने के लिए
  • चुन्नी: कन्याओं को ओढ़ाने के लिए
  • फल: कन्याओं को भोग स्वरूप अर्पित करने के लिए
  • प्रसाद भोजन: हलवा, पूरी और काले चने
  • उपहार और दक्षिणा: कन्याओं को विदाई के समय देने के लिए भेंट

कन्या पूजन स्टेप बाय स्टेप विधि 

  • नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को आदरपूर्वक अपने घर आमंत्रित करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कन्याओं के साथ एक छोटा बालक (जिसे बटुक भैरव का रूप माना जाता है) भी अवश्य होना चाहिए।
  • वैसे तो नौ कन्याओं और एक बालक का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन यदि इतनी संख्या न हो पाए, तो जितनी भी कन्याएं आएं, उनका पूरी श्रद्धा के साथ सत्कार करें।
  • घर पधारी कन्याओं और बालक के सबसे पहले स्वच्छ जल से चरण धोएं।
  • चरण धोने के बाद उन्हें साफ और पवित्र आसन पर सम्मान के साथ बिठाएं।
  • अब सभी के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद सभी की कलाई पर कलावा बांधें।
  • सभी कन्याओं को लाल रंग की चुन्नी आदरपूर्वक ओढ़ाएं।
  • इसके पश्चात धूप-दीप जलाकर सभी कन्याओं और बालक की आरती उतारें।
  • अब सभी को पारंपरिक प्रसाद हलवा, पूरी और काले चने का भोग परोसें और श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं।
  • जब सभी भोजन कर लें, तब उन्हें अपनी श्रद्धा के अनुसार उपहार और दक्षिणा दें।
  • अंत में सभी कन्याओं और बालक के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें और माता रानी के जयकारे के साथ उन्हें विदा करें।

कन्या पूजन भोग?

कन्या पूजन में विशेष रूप से सूजी का हलवा, पूरी और सूखे काले चने का पारंपरिक भोग लगाया जाता है। यदि आप चाहें तो इसके साथ बिना लहसुन-प्याज की आलू या कद्दू की सात्विक सब्जी भी तैयार कर सकते हैं। 

कन्या पूजन में क्या गिफ्ट दें?

कन्या पूजन में आप कन्याओं को चुनरी, चूड़ियां, कॉपियां, पेंसिल, कलर बॉक्स, फल या खिलौने के साथ अपनी श्रद्धा अनुसार दक्षिणा भी दे सकते हैं। ये उपहार बच्चों को बहुत पसंद आते हैं और बेहद शुभ भी माने जाते हैं। 

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