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नवरात्रि में क्यों भरा जाता है मां दुर्गा का खोइछा? जानिए तिथि और इसका धार्मिक महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 17, 2026 01:25 pm IST,  Updated : Oct 17, 2026 01:25 pm IST

नवरात्रि में मां दुर्गा का खोइछा भरने का विशेष धार्मिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि खोइछा भरने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। तो यहां जानिए खोइछा कैसे भरा जाता है और इसकी तिथि क्या रहेगी।

नवरात्रि में खोइछा का महत्व- India TV Hindi
नवरात्रि में खोइछा का महत्व Image Source : INDIA TV

नवरात्रि में शक्ति की नौ रूपों की उपासना और व्रत करने का विधान है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की उपासना के साथ ही परंपरा निभाई जाती हैं जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों को और मजबूत करती हैं। ऐसे ही नवरात्रि में बिहार के मिथिल क्षेत्र में मां दुर्गा का खोइछा भरने की परंपरा है। सुहागिन महिलाओं संतान, पति की लंबी आयु की कामना और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता दुर्गा का खोइछा भरती हैं। खोइछा विशेष रूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के दिन भरा जाता है। तो आइए जानते शारदीय नवरात्रि में खोइछा किस दिन भरा जाएगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

खोइछा में क्या-क्या चीजें शामिल होती हैं?

  • लाल कपड़ा
  • साड़ी
  • श्रृंगार की सामग्री
  •  फल
  • मिठाई
  • 5 पान पत्ता
  • 5 सुपारी
  • 1 नारियल
  • चावल (अक्षत)
  • दूर्वा
  • हल्दी का टुकड़ा।
  • दक्षिणा (पैसा)

खोइछा कैसे भरा जाता है?

माता दुर्गा की प्रतिमा के सामने नीचे लाल कपड़ा बिछा दें। इसके बाद उसमें  साड़ी, सिंदूर, चूड़ी, आलता, नेल पॉलिश, बिंदी और अन्य सुहाग की सामग्री रख दें। इसके साथ ही कपड़े पर  5 पान पत्ता, 5 सुपारी, नारियल, पैसा, मिठाई, फल, फूल, चावल, दूर्वा, हल्दी आदि चीजें भी रखें। वहीं साइड में दीया और धूप जलाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना बोलें और पूजा में हुई भूलचूक की माफी मांगते हुए उस कपड़े को अच्छे से बांध दें। इस कपड़े को मां दुर्गा के पास रख दें।

महाष्टमी पूजा का समय 2026

नवरात्रि की अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। महाष्टमी को महा दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। 

महा नवमी पूजा का समय 2026

नवरात्रि नवमी तिथि का आरंभ 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। नवमी तिथि का समापन 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा।

खोइछा का धार्मिक महत्व

बिहार और मिथिलांचल में बेटी जब भी मायके आती हैं तो उसे खोइछ देकर ही विदा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा जब अपने मायके आती हैं तो विदाई या पूजन के समय उन्हें सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर उनका खोइछा भरा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि माता रानी हमारे घर-परिवार को सुखी, संपन्न और सुरक्षित रखें।  

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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