Nirjala Ekadashi Daan 2026: निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी होती है। इस दिन लोग बिना अन्न और जल के कठिन व्रत रखते हैं। सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक भी बूंद ग्रहण नहीं की जाती। कहते हैं इस कठोर व्रत का नियम से पालन करने से साल की सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ मिल जाता है। इस दिन जितना महत्व व्रत रखने का माना गया है उतना ही महत्व दान का भी होता है। कहते हैं निर्जला एकादशी पर किये गये दान का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। लेकिन अब सवाल ये आता है कि इस दिन किन चीजों का दान करना चाहिए और दान के लिए कौन सा मुहूर्त सबसे शुभ रहेगा, चलिए इस बारे में आपको बताते हैं।
निर्जला एकादशी दान सूची 2026
- जल से भरा मिट्टी का घड़ा: निर्जला एकादशी पर 'जल दान' का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को मिट्टी का नया घड़ा दान करना चाहिए। इसके साथ ही आप चाहें तो राहगीरों के लिए प्याऊ भी लगवा सकते हैं या फिर मीठा शरबत भी पिला सकते हैं।
- मौसमी फलों का दान: निर्जला एकादशी पर फलों का दान भी बेहद पुण्यदायी माना जाता है। आप इस दिन मौसमी फलों जैसे तरबूज, खरबूजे, आम इत्यादि का इस्तेमाल कर सकते हैं। कहते हैं ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- छाता और हाथ पंखें का दान: निर्जला एकादशी भीषण गर्मी में पड़ती है, इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को छाता और हाथ वाले पंखे का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।
- सत्तू, गुड़ और चने का दान: इस एकादशी पर सत्तू, चने और गुड़ का दान पितृ दोषों से मुक्ति दिलाता है और घर की सुख-समृद्धि बढ़ाता है।
- वस्त्र और जूता-चप्पल का दान: इस दिन राहगीरों को सूती कपड़े और चप्पलों का दान करना भी बेहद पुण्य का काम माना जाता है। कहते हैं इससे ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी दान मुहूर्त 2026
वैसे तो निर्जला एकादशी पर दान करने का सिलसिला एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि के पारण तक चलता है, लेकिन अगर आप दान करने के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों के बारे में जानना चाहते हैं तो वो इस प्रकार हैं...
- 25 जून को सुबह 05:25 बजे से सुबह 10:30 बजे तक
- 25 जून को शाम 05:30 बजे से सूर्यास्त तक
- 26 जून को सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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