Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Vidhi Step By Step: निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इस एकादशी में 24 घंटों तक अन्न या जल किसी भी चीज का सेवन नहीं किया जाता है। बता दें इस साल ये व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस व्रत को व्रतों का राजा कहा जाता है। अगर आप पहली बार ये व्रत रखने जा रहे हैं तो आपके मन में इससे जुड़े कई तरह के सवाल होंगे। जैसे ये व्रत कैसे रखा जाता है? क्या इस व्रत में जल बिल्कुल भी नहीं पीना है? साथ ही इस व्रत का पारण कब और कैसे करते हैं? यहां हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देंगे, जिससे इस व्रत से जुड़ी हर कन्फ्यूजन दूर हो जाएगी।
निर्जला एकादशी व्रत कैसे रखते हैं?
स्टेप 1
निर्जला एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले ही शुरू हो जाती है। व्रत के एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए। विशेष रूप से दशमी की रात को प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा जैसे तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी नहीं करना है। इस दिन हल्का और सात्विक भोजन ही लें।
स्टेप 2
एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले ही उठ जाएं और स्नान करें। संभव हो तो स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र पहनें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

स्टेप 3
- इसके बाद पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
- फिर हाथ में थोड़ा सा गंगाजल, अक्षत और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत रखने का संकल्प लें। इस दौरान भगवान से अपनी मनोकामना भी कहें। संकल्प के बाद हाथ में ली गई सामग्री को भगवान के चरणों में अर्पित कर दें।
स्टेप 4
- ध्यान रहे कि संकल्प लेने के बाद अगले दिन सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं करना है।
- बस पूजा के समय तीन बार आचमन करने यानी हथेली में नाममात्र जल लेकर पीने की अनुमति होती है, लेकिन वह पानी केवल कंठ तक पहुंचना चाहिए पेट में नहीं। इसी कारण आचमन बस जल की कुछ बूंदों से ही किया जाता है।
- इस दिन क्रोध से बचें, किसी का अपमान न करें और झूठ न बोलें। पूरा दिन भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का मन ही मन जाप करते रहें।

स्टेप 5
- शाम में भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करें और निर्जला एकादशी की कथा सुनें।
- कथा सुनने के बाद भगवान की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।
- आप चाहें तो इस समय विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
- इस व्रत में रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। यदि संभव हो, तो एकादशी की पूरी रात में भजन-कीर्तन करें या फिर धार्मिक पुस्तकें पढ़ें।
स्टेप 6
- व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में एकादशी व्रत का पारण कर लें।
- 26 जून 2026 को एकादशी व्रत पारण का शुभ समय सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच रहेगा।
- व्रत पारण करने से पहले स्नान कर भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करनी है।
- इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को जल से भरा घड़ा, अनाज, मौसमी फल, हाथ का पंखा और दक्षिणा दान करनी है।
- दान करने के बाद अपना व्रत खोल लें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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