पितृ पक्ष के दौरान हिंदू धर्म में मान्यता रखने वाले लोग श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से व्यक्ति पितृ दोष से भी मुक्ति पाता है और साथ ही पितरों को सद्गति भी प्राप्त होती है। वहीं जिन लोगों की मृत्यु को अभी एक साल नहीं हुआ है यानि बरसी नहीं हुई है उनका श्राद्ध और पिंडदान घर के लोगों के द्वारा किया जाना चाहिए या नहीं, आइए इस विषय में विस्तार से जानते हैं।
जिन लोगों की मृत्यु को 1 साल नहीं हुआ उनका श्राद्ध कर सकते हैं या नहीं?
- गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु के बाद घर के लोगों को 13 दिनों के भीतर मृत सदस्य का अंतिम संस्कार, पिंडदान और शांति पाठ करवा लेना चाहिए।
- वहीं अगर व्यक्ति की मृत्यु को अभी एक वर्ष नहीं हुआ है और पितृपक्ष शुरू हो गए हैं तो पितृ पक्ष के दौरान केवल जल और तिल से तर्पण पितृ को देना चाहिए और उन्हें स्मरण करना चाहिए।
- श्राद्ध और पिंडदान मृत्यु के एक वर्ष बाद किया जाना ही शास्त्रों के अनुसार सही माना गया है। बरसी के बाद विधिवत रूप से पितृ की मृत्यु तिथि के दिन श्राद्ध घर के लोगों को करना चाहिए।
- धार्मिक मत के अनुसार व्यक्ति के पहले वार्षिक श्राद्ध होने के बाद ही उसे पितृ की श्रेणी में रखा जाता है। बरसी होने के बाद हर साल पितरों का श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।
अकाल मृत्यु वालों का श्राद्ध कब करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हुई है या किसी दर्घटना में व्यक्ति की जान गई है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए नारायण बलि का अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए। नारायण बलि करने से व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्ति की मृत्यु तिथि पता न हो तो पितृपक्ष के दौरान अमावस्या तिथि पर ऐसे लोगों का श्राद्ध किया जाना चाहिए। धार्मिक मतानुसार अमावस्या का श्राद्ध करने से आपके सभी पितृ प्रसन्न होते हैं। आपको बता दें कि साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होंगे और 10 अक्टूबर तक रहेंगे। पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर आप हमारी वेबसाइट पर देख सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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