नवरात्रि की अष्टमी तिथि के दिन कुछ उपाय करने से राहु ग्रह के बुरे प्रभावों से आपको मुक्ति मिल सकती है। मान्यताओं के अनुसार माता दुर्गा की आठवीं शक्ति माता महागौरी, राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। ऐसे में अगर आप नवरात्रि के आठवें दिन कुछ आसान से उपाय कर लेते हैं तो राहु ग्रह शांत हो जाता है। इन उपायों को करने से राहु की महादशा का बुरा असर भी दूर हो सकता है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
नारियल से जुड़ा उपाय
नवरात्रि के आठवें दिन आपको माता महागौरी को एक जटावाला नारियल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान से आपको माता की पूजा करनी चाहिए और अंत में राहु के बुरे प्रभावों को दूर करने के लिए माता से प्रार्थना करनी चाहिए। पूजा के बाद इस नारियल को बहते जल में प्रवाहित कर दें या फिर किसी जरूरतमंद को इसे दे दें। इस उपाय को करने से राहु शांत होता है और जीवन की बाधाएं कम होने लगती हैं। साथ ही गुप्त शत्रुओं से भी आपको मुक्ति मिलती है।
कपूर और लौंग का उपाय
महाअष्टमी को सूर्यास्त के बाद आपको एक मिट्टी के दीपक में कपूर के साथ दो साबुत लौंग जलानी चाहिए। इसके बाद पूरे घर में इसका धुआं आपको फैलाना चाहिए। अंत में पूजा स्थल पर बैठकर माता महागौरी के मंत्र- 'ॐ ह्रीं श्रीं महागौर्यै नमः' का 108 बार जप करना चाहिए। ऐसा करने से राहु की नकारात्मकता तो दूर होती ही है साथ ही घर का वास्तु भी सुधरता है। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति के लिए भी इस उपाय को अच्छा माना गया है।
कन्या पूजन के दौरान करें ये उपाय
कई लोग महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन भी करते हैं। कन्या पूजन के बाद कन्याओं को विदाई देते समय अगर आप सफेद चीजों का दान करते हैं तो माता महागौरी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही माता राहु के बुरे प्रभावों से भी आपको मुक्त करती हैं।
महाअष्टमी की रात्रि राहु शांति मंत्र का जप
मंत्र- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
महाअष्टमी की रात में आपको एकांत स्थान पर बैठकर सबसे पहले माता महागौरी का ध्यान करना चाहिए और उसके बाद ऊपर दिए गए राहु मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए। ऐसा करने से राहु के अशुभ प्रभाव दूर होने लगते। साथ ही जो लोग राहु की महादशा या अंतर्दशा से गुजर रहे हैं उनके जीवन में भी सकारात्मकता आती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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