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सावन में श्री रुद्राष्टकम कब और कैसे पढ़ें, जानिए क्या हैं इसके लाभ

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 30, 2026 09:11 pm IST,  Updated : Jul 30, 2026 09:11 pm IST

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से महादेव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। जानिए सावन में रुद्राष्टकम पढ़ने की सही विधि और इससे मिलने वाले लाभ क्या हैं।

Rudrashtakam Path in Sawan- India TV Hindi
सावन में रुद्राष्टकम का पाठ Image Source : PINTEREST

सावन का पवित्र महीना महादेव और मां पार्वती की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन में भक्त व्रत, अभिषेक और मंत्र-जाप के जरिए भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। सावन में श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इसका पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आने और शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। जानिए सावन में श्री रुद्राष्टकम कब, कैसे पढ़ें और क्या हैं इसके लाभ।

क्या है रुद्राष्टकम?

श्री रुद्राष्टकम भगवान शिव की स्तुति में रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। मान्यता है कि श्रीराम ने भी रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी और रुद्राष्टकम का पाठ किया था।

रुद्राष्टकम पाठ कब और कैसे करें?

  • सावन में रुद्राष्टकम का पाठ करने के लिए सुबह का समय शुभ माना जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। 
  • सूर्य देव को जल अर्पित कर पूजा की शुरुआत करें। पूजा स्थान पर दीपक जलाकर शिव जी और मां पार्वती का ध्यान करें। 
  • शिवजी को जल अर्पित करने के बाद श्रद्धा भाव से उनकी आराधना और आरती करें।
  • इसके बाद शांत मन से श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। 
  • सावन के पावन महीने में सुबह और शाम नियमित रूप से रुद्राष्टकम का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
  • माना जाता है कि लगातार 7 दिनों तक विधि-विधान से रुद्राष्टकम का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। 
  • पाठ पूरा करने के बाद महादेव को खीर, फल या मिठाई का भोग लगाएं और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। 

रुद्राष्टकम पाठ करने के लाभ

रुद्राष्टकम के नियमित पाठ से मन शांत होता है, तनाव और चिंताओं को कम करने में सहायता मिलती है।

यह स्तोत्र आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक है।
सावन में इसका पाठ करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।

रुद्राष्टकम स्तोत्र (Rudrashtakam Path)

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।1।।

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं, गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं, गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।2।।
  
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्रीशरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा, लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा।।3।।

चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।4।।
 
प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।5।।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।6।।
 
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजंतीह लोके परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं, प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।7।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां, नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।8।।
  
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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