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Sharad Purnima 2026: चंद्रमा की 16 कलाएं क्या हैं और क्यों शरद पूर्णिमा की रात होती है अमृत वर्षा? यहां जानिए इसका धार्मिक महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 25, 2026 11:09 am IST,  Updated : Oct 25, 2026 11:20 am IST

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा और मां लक्ष्मी की पूजा करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था।

शरद पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
शरद पूर्णिमा 2026 Image Source : INDIA TV

ज सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमा है, जिसे शरद पूर्णिमा कहते हैं।  शरद ऋतु में आने वाली आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में केवल शरद पूर्णिमा की रात ही ऐसी होती है जब चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रात की चांदनी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। आइए जानते हैं चंद्रमा की ये 16 कलाएं कौन-कौन सी हैं और क्यों इसी रात अमृत वर्षा होती है।

चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम और उनका धार्मिक महत्व

  1. अमृता- अमरत्व और जीवन की निरंतरता का प्रतीक (जो कभी नष्ट न हो और जीवन प्रदान करें)

  2. मंदा- मन की स्थिरता और शांति का प्रतीक

  3. पुष्य- सुंदरता और सौंदर्य के महत्व को दर्शाती है

  4. पुष्टि- शरीर और मन के विकास एवं पोषण का प्रतीक

  5. तुष्टि- संतोष और तृप्ति प्रदान करने वाली

  6. धृति- धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक

  7. शशिनी (शाशनी): प्रकाश और ज्ञान देने वाली कला

  8. चंद्रिका- चांदनी की तरह शीतलता देने वाली (प्रकाश और नई दिशा से संबंधित)

  9. कांति- तेज और सौंदर्य से युक्त

  10. ज्योत्स्ना- चंद्रमा की शीतलता और मंद प्रकाश का प्रतीक (अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश)

  11. श्री- समृद्धि, वैभव और लक्ष्मी का रूप

  12. प्रीति- स्नेह प्रदान करने वाली कला

  13. अंगदा- अंग-प्रत्यंग में कांति और मजबूती

  14. रति- चंद्र देव की इस कला को आकर्षण और प्रेम का प्रतीक

  15. स्मृति- अनुभवों और स्मरण शक्ति से संबंधित

  16. वपु- सुंदरता, शरीर और स्वास्थ्य का प्रतीक

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा बरसाते हैं अमृत

शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है। इसलिए इस दिन की चांदनी को अत्यंत शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की चांदनी के नीचे खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि में चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है, जिससे खुले आसमान के नीचे रखी खीर औषधीय गुणों से युक्त हो जाती है। यह खीर खाने से उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और निरोगी काया की प्राप्ति होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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