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आज चंद्रमा करेंगे अमृत वर्षा, जानें शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का सही नियम और समय

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 25, 2026 08:58 am IST,  Updated : Oct 25, 2026 08:58 am IST

शरद पूर्णिमा के दिन रात के समय चंद्रमा की चांदनी के नीचे खीर रखने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अमृत वर्षा करते हैं। तो यहां जानिए आज खीर रखने का सही समय और नियम क्या रहेगा।

शरद पूर्णिमा 2026- India TV Hindi
शरद पूर्णिमा 2026 Image Source : INDIA TV

आज यानी कि 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। शरद पूर्णिमा को कोजागरा या कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्र पूजा और रात्रि में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी माता की आराधना करने से व्यक्ति को समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मिलता और धन-धान्य में वृद्धि होती है। इस दिन चंद्रोदय के बाद रात के समय खुले आसमान के नीचे खीर रखने की भी परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और उनकी किरणों से अमृत वर्षा होती है। ऐसे में चांद की चांदनी के नीचे खीर रखने से उसमें अमृत (दिव्य औषधीय गुण) का समावेश हो जाता है, जो स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और आरोग्य प्रदान करता है। तो आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा के दिन खीर रखने का सही समय और नियम क्या रहेगा।

शरद पूर्णिमा का महत्व

शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है। इसलिए इस दिन की चांदनी को अत्यंत शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन पूजा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और धन, वैभव और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही इस दिन चंद्र देव के दर्शन, पूजन करने से चंद्र दोष भी शांत होता है और मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

शरद पूर्णिमा के दिन खीर रखने का नियम

  • खीर गाय के दूध, चावल, चीनी और मखाना मिलाकर तैयार करें। खीर बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें।
  • चंद्रोदय के बाद राम में खीर का बर्तन खुले आसमान के नीचे ऐसी जगह रखें जहां सीधे चंद्रमा की रोशनी पड़ती हो।
  • खीर वाले बर्तन को पूरी तरह से बंद ढक्कन से न ढकें। इसे किसी बारीक सूती कपड़े या महीन जाली से ढक कर रखें, जिससे चंद्रमा की किरणें और शीतलता सीधे खीर पर पड़े।
  • दूसरे दिन सुबह के समय मां लक्ष्मी और विष्णु जी को पहले खीर का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद पूरे परिवार को खीर का प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।
  • व्रती इसी खीर को खाकर व्रत का पारण करते हैं। इसी के साथ चंद्र देव से अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सौभाग्य की कामना की जाती है। 

शरद पूर्णिमा के दिन खीर रखने का समय

पंचांग के अनुसार, अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा। 25 अक्टूबर को चंद्रोदय शाम 5 बजे होगा। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के बाद खीर रखा जाता है लेकिन इस समय सूर्यास्त नहीं हुआ होगा, इसलिए रात होने के बाद खीर रखना सही रहेगा। 25 अक्टूबर को रात 8 बजे के बाद खीर चांदनी में रख सकते हैं। हालांकि इसका कोई अनिवार्य शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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