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Sheetala Ashtakam Pdf: शीतला अष्टमी पर शीतलाष्टक स्तोत्र का जरूर करें पाठ, रोग-तनाव से मिलेगी मुक्ति, घर आएगी सुख-समृद्धि

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Mar 10, 2026 01:50 pm IST, Updated : Mar 10, 2026 01:51 pm IST

Sheetala Ashtakam Pdf: शीतला माता की पूजा के समय शीतलाष्टकम यानी शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं इस स्तोत्र का पाठ करने से मां शीतला की शीघ्र ही कृपा प्राप्त हो जाती है।

Sheetala Ashtakam Pdf- India TV Hindi
Image Source : CANVA शीतला अष्टमी पर शीतलाष्टक स्तोत्र का जरूर करें पाठ

Sheetala Ashtakam Pdf: शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा पर्व के दिन शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इस स्तोत्र का पाठ करने से शीतला माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जिससे शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार यह स्तोत्र त्वचा रोग निवारक और आरोग्यता प्रदान करने वाला माना गया है। चलिए आपको बताते हैं शीतलाष्टक स्तोत्र के लिरिक्स।

शीतलाष्टक स्तोत्र के लिरिक्स

॥ विनियोग ॥

ऊँ अस्य श्रीशीतला स्तोत्रस्य महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, शीतली देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्तिः, सर्वविस्फोटक निवृत्तये जपे विनियोगः ॥

ऋष्यादि-न्यासः

श्रीमहादेव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीशीतला देवतायै नमः हृदि, लक्ष्मी (श्री) बीजाय नमः गुह्ये, भवानी शक्तये नमः पादयो, सर्व-विस्फोटक-निवृत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ॥

ध्यानः

ध्यायामि शीतलां देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम् ।

मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम् ॥

मानस-पूजनः

ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ वं जल-तत्त्वात्मकं नैवेद्यं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः।

मन्त्रः

ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः ॥ [11 बार]

ईश्वर उवाच

वन्देऽहं शीतलां देवींरासभस्थां दिगम्बराम्।

मार्जनीकलशोपेतांशूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥1॥

वन्देऽहं शीतलां देवींसर्वरोगभयापहाम्।

यामासाद्य निवर्तेतविस्फोटकभयं महत्॥2॥

शीतले शीतले चेतियो ब्रूयद्दाहपीडितः।

विस्फोटकभयं घोरंक्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥3॥

यस्त्वामुदकमध्ये तुध्यात्वा सम्पूजयेन्नरः।

विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥4॥

शीतले ज्वरदग्धस्यपूतिगन्धयुतस्य च।

प्रणष्टचक्षुषःपुंसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम्॥5॥

शीतले तनुजान् रोगान्नृणां हरसि दुस्त्यजान्।

विस्फोटकविदीर्णानांत्वमेकाऽमृतवर्षिणी॥6॥

गलगण्डग्रहा रोगा येचान्ये दारुणा नृणाम्।

त्वदनुध्यानमात्रेणशीतले यान्ति सङ्क्षयम्॥7॥

न मन्त्रो नौषधं तस्यपापरोगस्य विद्यते।

त्वामेकां शीतले धात्रींनान्यां पश्यामि देवताम्॥8॥

॥ फल श्रुति ॥

मृणालतन्तुसदृशींनाभिहृन्मध्यसंस्थिताम्।

यस्त्वां सञ्चिन्तयेद्देवितस्य मृत्युर्न जायते॥9॥

अष्टकं शीतलादेव्यायो नरः प्रपठेत्सदा।

विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥10॥

श्रोतव्यं पठितव्यं चश्रद्धाभाक्तिसमन्वितैः।

उपसर्गविनाशायपरं स्वस्त्ययनं महत्॥11॥

शीतले त्वं जगन्माताशीतले त्वं जगत्पिता।

शीतले त्वं जगद्धात्रीशीतलायै नमो नमः॥12॥

रासभो गर्दभश्चैवखरो वैशाखनन्दनः।

शीतलावाहनश्चैवदूर्वाकन्दनिकृन्तनः॥13॥

एतानि खरनामानिशीतलाग्रे तु यः पठेत्।

तस्य गेहे शिशूनां चशीतलारुङ् न जायते॥14॥

शीतलाष्टकमेवेदं नदेयं यस्यकस्यचित्।

दातव्यं च सदा तस्मैश्रद्धाभक्तियुताय वै॥15॥

॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे शीतलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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