Tulsi Vivah Ke Din Tulsi Ko Kaise Sajaye: तुलसी विवाह हिंदू धर्म में एक बेहद ही पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। जिसका आयोजन देवउठनी एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक की अवधि में कभी भी किया जा सकता है। वैसे ज्यादातर लोग कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी विवाह कराते हैं। कहते हैं तुलसी विवाह कराने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास सदैव बना रहता है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि इस दिन तुलसी के पौधे को सजाएं कैसे? तो चलिए आपको बताते हैं तुलसी को दुल्हन की तरह सजाने की पूरी विधि।
तुलसी विवाह के दिन तुलसी को कैसे सजाएं?
- तुलसी विवाह से पहले तुलसी के चौरे को अच्छी तरह साफ करें। फिर उसे गंगाजल से शुद्ध कर लें।
- तुलसी चौरे को गोबर और मिट्टी से लीपकर भी शुद्ध कर सकते हैं। (तुलसी चौरा एक चौकोर या वृत्ताकार उठा हुआ चबूतरा होता है, जहां तुलसी का पौधा लगाया जाता है। ये आमतौर पर घर के आंगन या बालकनी में बनाया जाता है।)
- इस पर सुदंर रंगोली बना लें।
- अगर चौरा नहीं बनवा रखा है तो आप तुलसी के गमले को किसी टेबल पर रख सकते हैं।
- अब तुलसी के गमले को चावल के आटे, रोली, गेरू और हल्दी से सजा लें। साथ ही गमले पर शुभ चिन्ह जैसे स्वास्तिक बना लें।
- फिर घर के आंगन में भी एक सुदंर रंगोली बनाएं।
- तुलसी माता को दुल्हन की तरह सजाएं। उन्हें लाल या पीले रंग की साड़ी या चुनरी ओढ़ाएं।
- कांच की चूड़ियां पहनाएं। बिंदी, मांग टीका, मेहंदी और कुमकुम भी लगाएं।
- चाहें तो तुलसी माता को छोटा सा मुकुट या घूंघट भी लगा सकते हैं।
- इसके बाद भगवान शालिग्राम को पीले वस्त्र, फूलमाला, तिलक और गहनों से सजाएं।
- विवाह कराने के लिए एक छोटा सा मंडप भी जरूर तैयार कर लें।
- मंडप को केले के पत्तों, आम के पत्तों और फूलों से अच्छे से सजा लें।
- मंडप के बीच में तुलसी माता और भगवान शालिग्राम को विराजित करें।
- तुलसी विवाह के शुभ मुहूर्त में विवाह विधि शुरू करें।
- तुलसी माता और भगवान विष्णु का पूजन करें।
- मंत्रों के साथ माला की अदला-बदली कराएं। ये प्रक्रिया जयमाला की रस्म का प्रतीक होती है।
- इसके बाद शालिग्राम भगवान को हाथ में उठाकर तुलसी के पौधे की 7 बार परिक्रमा करनी है। ये रस्म सात फेरे का प्रतीक मानी जाती है।
- अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित कर दें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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