नई दिल्ली: क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के वित्तीय ढांचे से प्रभावित BCCI भी भारतीय टीम के लिए प्रत्येक घरेलू और विदेशी शृंखला के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि शुरू करने की योजना बना रहा है। बोर्ड की वित्त समिति की बैठक में इसका शुरुआती खाका तैयार किया गया।
BCCI की वित्त समिति सैद्वांतिक तौर पर कॉरपोरेट की राह पर चलने पर सहमत हो गई, जहां मुनाफे में हिस्सेदारी का अनुपात सीधा बोर्ड की कमाई से जुड़ा होता है। सदस्यों ने ऐसा करने के लिए संभावित तरीकों पर बात की। BCCI के सूत्रों के अनुसार, IPL सीओओ सुंदर रमन ने वित्त समिति के सदस्यों के सामने प्रस्तुति दी जहां यह जानकारी दी गई कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया, ईसीबी और BCCI तथा पड़ोसी पीसीबी ने भी अपने देशों में प्रोत्साहन आधारित मॉडल अपना लिया है।
सूत्रों ने कहा, अभी BCCI 50 ओवरों के विश्व कप, विश्व टी20 या ICC चैंपियन्स ट्रॉफी जीतने पर क्रिकेटरों को अच्छी खासि प्रोत्साहन राशि देता रहा है लेकिन अब BCCI स्वदेश और विदेश में होने वाली प्रत्येक शृंखला के लिए प्रोत्साहन राशि की योजना बना रहा है। उदाहरण के लिए यदि भारत किसी खास विपक्षी टीम के खिलाफ स्वदेश में टेस्ट शृंखला में जीत दर्ज करता है तो फिर क्रिकेटर अपनी मैच फीस के अलावा बोर्ड से निश्चित प्रोत्साहन राशि पाने के भी हकदार होंगे।
यह राशि विरोधी टीम की स्थिति, परिस्थितियों, स्वदेश और विदेश तथा प्रदर्शन के प्रभाव के हिसाब से तय की जाएगी। रमन ने जहां शुरुआति प्रस्तुति दी वहीं विस्तृत खाके पर 22 जुलाई को होने वाली बैठक में चर्चा हो सकती है।
इस बीच वित्त समिति ने भारतीय महिला टीम की क्रिकेटरों को ग्रेड भुगतान प्रणाली के तहत ए और बी दो ग्रुप में बांटने का फैसला किया है। सूत्रों ने बताया कि ग्रेड ए की खिलाड़ी जैसे कप्तान मिताली राज, तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी और शीर्ष बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर को वार्षिक रिटेनरशिप शुल्क के रूप में दस लाख रुपये जबकि ग्रुप बी में शामिल खिलाड़ियों को पांच लाख रुपये मिलेंगे।