नयी दिल्ली: हरफनमौला रविंद्र जडेजा भले ही धोनी के कितने भी चहेतों हों लेकिन बुरे फ़ार्म के चलते उन्हें कोई नहीं बचा पाया और उन्हें करीब चार महीने घोड़े और दोस्तों के सात बिताने पड़े।
दरअसल हाल ही में टेस्ट टीम में वापसी करने वाले जडेजा ने स्वीकार किया है कि भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने अपना समय दोस्तों और घोड़ों के साथ बिताया और दमखम बढाने का काम रणजी सत्र से पहले शुरू किया जिससे वापसी का उनका दावा पुख्ता हुआ।
जडेजा ने जून में बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी वनडे खेला था । उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच नवंबर से शुरू हो रही दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के लिये भारत की 16 सदस्यीय टीम में चुना गया है ।
जडेजा ने बीसीसीआई टीवी से कहा , सत्र की शुरूआत के कुछ महीने पहले मैं मैदान के पास भी नहीं गया और ना ही बल्ला या गेंद उठाया । मैने तय कर लिया था कि रणजी सत्र की नये सिरे से शुरूआत करूंगा । मैने क्रिकेट से अपना ध्यान हटाया और दूसरे कामों में व्यस्त रहा । मैने अपने फार्महाउस पर अपने घोड़ों और दोस्तों के साथ समय बिताया।
सौराष्ट्र के लिये दो रणजी मैचों में 24 विकेट ले चुके जडेजा ने कहा , रणजी सत्र के एक महीने पहले जब तैयारी शुरू हुई तो मैने तय किया कि यह मेरा समय है और मुझे अपनी ताकत पर काम करके वापसी करनी है । मैने जिला स्तर के मैच खेले क्योंकि मुझे लगा कि ज्यादा से ज्यादा मैच अभ्यास जरूरी है।
उसने कहा , मैं भाग्यशाली रहा कि अच्छा प्रदर्शन कर सका । कई बार खुद को साबित करने में पांच छह महीने लग जाते हैं । मैं कहूंगा कि मैं खुशकिस्मत रहा कि सत्र की शुरूआत से पहले ही सब ठीक हो गया ।