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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में कैसे बचाया फॉलो-ऑन, आकाशदीप ने शेयर किया सबसे यादगार पल

 Written By: Rishikesh Singh
 Published : Jan 16, 2025 12:11 pm IST,  Updated : Jan 16, 2025 12:11 pm IST

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में आकाशदीप सिंह ने जसप्रीत बुमराह के साथ मिलकर गाबा टेस्ट मैच में फॉलऑन बचाया था। आकाशदीप ने उस पारी को लेकर अपनी कुछ यादों को शेयर किया है।

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आकाश दीप सिंह और जसप्रीत बुमराह Image Source : GETTY

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 का आयोजन हाल ही में किया गया था। जहां ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टीम इंडिया को 3-1 से सीरीज में मात दी और 10 सालों के बाद खिताब अपने नाम किया। इस सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजी काफी हद तक अच्छी रही। टीम इंडिया की गेंदबाजी यूनिट का हिस्सा रहे आकाश दीप सिंह ने भी इस सीरीज के दौरान दो मुकाबले खेले थे। जहां उन्होंने पांच विकेट झटके। इसी बीच आकाश दीप सिंह ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।

क्या बोले आकाशदीप?

भारतीय तेज गेंदबाज आकाशदीप सिंह का मानना है कि टीम इंडिया मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट मैच को बड़ी आसानी के साथ जीत सकती थी, लेकिन यशस्वी जायसवाल ने मार्नश लाबुशेन का कैच छोड़ दिया। जब ऑस्ट्रेलियाई टीम 91 रन पर 6 विकेट खोकर बल्लेबाजी कर रही थी। उनके बाद मार्नश लाबुशेन ने अर्धशतक जड़ दिया। आकाश दीप का मानना ​​है कि अगर भारत ऑस्ट्रेलिया को 130 रनों पर समेटने में कामयाब हो जाता है तो संभावना थी कि टीम इंडिया आसानी से वह मैच जीत जाए।

बुमराह के साथ खेली यादगार पारी

आकाशदीप ने कहा कि जानबूझकर कोई भी कैच नहीं छोड़ता और ऐसी चीजें होना आम बात है, लेकिन उन्हें थोड़ा बुरा लगा कि अगर वह कैच पकड़ लिया जाता और वे ऑस्ट्रेलिया को 130 रन के आसपास पर ऑलआउट कर देते तो, शायद वह मेलबर्न में जीत हासिल कर सकते थे। आकाशदीप सिंह ने पीटीआई से बात करते हुए ब्रिस्बेन टेस्ट में जसप्रीत बुमराह के साथ आखिरी विकेट के लिए 47 रन की साझेदारी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वह उस मुकाबले में अपनी योजनाओं को लेकर बहुत स्पष्ट थे।

उन्होंने कहा कि उस दिन मेरी सोच यह थी कि मैं किसी भी तरह की चोट खाने के लिए तैयार हूं, लेकिन आउट नहीं होऊंगा। मुझे रन बनाने की जरूरत थी। मुझे किसी भी हाल में लंबे समय तक बल्लेबाजी करनी थी। ऐसा नहीं था कि फॉलोऑन बचाने की बात मेरे दिमाग में थी। मेरे दिमाग में यह बात थी कि मैं जितनी देर बल्लेबाजी करूंगा, हमारे बल्लेबाजों को दूसरी पारी में उतना ही कम समय बल्लेबाजी करनी पड़ेगी। उस दिन मैं गेंद को अच्छी तरह से देख रहा था। उनकी उस पारी के बाद पूरी टीम ने उनकी काफी ज्यादा तारीफ की थी और अगले दिन वह मीडिया में चर्चा का विषय बन चुके था।

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