टीम इंडिया से बाहर चल रहे घरेलू क्रिकेट के धुरंधर बल्लेबाज सरफराज खान ने एक बार फिर अपनी निराशा खुलकर जाहिर की है। रेलवे के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले के पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब सुबह उठकर उनके मन में यही सवाल आता है कि जब टीम में मौका ही नहीं मिलना है, तो वह इतनी कड़ी मेहनत क्यों कर रहे हैं। सरफराज ने बताया कि वह रोज सुबह 5 बजे उठकर अपनी पुरानी रूटीन को फॉलो करते हैं। वह भारत के लिए खेल चुके हैं और मुंबई के लिए लगातार रन बना रहे हैं, लेकिन फिर भी टीम में वापसी का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
पिता से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणा
न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से सरफराज ने बताया कि मुश्किल समय और निराशा के दौर में उनके पिता नौशाद खान ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा हैं। सरफराज का कहना है कि जब कभी उनके मन में यह सवाल उठता है कि वह इतनी मेहनत क्यों करें, तब वह अपने पिता को कड़ी मेहनत करते हुए देखते हैं। पिता को देखकर उन्हें फिर से मैदान पर उतरने और उनके लिए रन बनाने की प्रेरणा मिल जाती है। अपनी प्रैक्टिस के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनसे मिलना हो तो उसे घर जाने की जरूरत नहीं है, वह सुबह 6 बजे सीधे आजाद मैदान या क्रॉस मैदान पहुंच जाए, सरफराज वहीं मिलेंगे।
चयनकर्ताओं को सिर्फ घरेलू पिचों के लिए उपयोगी लगती है मेरी सेवाएं- सरफराज
फरवरी 2024 में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले सरफराज ने अब तक अपने सभी छह टेस्ट मैच देश में यानी घरेलू मैदानों पर ही खेले हैं। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि टीम मैनेजमेंट उनकी सेवाएं सिर्फ भारत की घरेलू पिचों पर ही देख रहा है, हालांकि चयनकर्ताओं ने उन्हें इस बारे में सीधे तौर पर कुछ नहीं बताया है।
विदेशी दौरों पर मौका न मिलने पर हैरानी जताते हुए सरफराज ने साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के दौरों का जिक्र किया, जहां उन्होंने 'इंडिया ए' की तरफ से खेलते हुए अभ्यास मैचों में शानदार शतक जड़े थे। उन्होंने साफ किया कि वह इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, उनका काम सिर्फ क्रिकेट खेलना है। अगर चयनकर्ता उन्हें चुनेंगे तो वह देश के लिए खेलेंगे, वरना घरेलू क्रिकेट खेलते रहेंगे और वहां रन बनाते रहेंगे।
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