लखनऊ: 11 साल पहले रोटरडम में ब्रॉन्ज मेडल नहीं जीत पाने की टीस उनके दिल में नासूर की तरह घर कर गई थी और अपनी सरजमीं पर घरेलू दर्शकों के सामने इस जख्म को भरने के बाद कोच हरेंद्र सिंह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके। आप उनकी कहानी जानेंगे तो आपको बरबस ही ‘चक दे इंडिया’ में महिला हॉकी टीम के कोच कबीर खान की याद आ जाएगी। कबीर खान की भूमिका को शाहरुख खान ने निभाया था।
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भारत के फाइनल में प्रवेश के बाद जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘यह मेरे अपने जख्म हैं और मैं टीम के साथ इसे नहीं बांटता। मैंने खिलड़ियों को इतना ही कहा था कि हमें मेडल जीतना है, रंग आप तय कर लो। रोटरडम में मिले जख्म मैं एक पल के लिए भी भूल नहीं सका था।’ रोटरडम में ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए मुकाबले में स्पेन ने भारत को पेनल्टी शूटआउट में हराया था। अपने 16 बरस के कोचिंग कैरियर में अपने जुनून और जज्बे के लिए मशहूर रहे हरेंद्र ने 2 बरस पहले जब फिर जूनियर टीम की कमान संभाली, तभी से इस खिताब की तैयारी में जुट गए थे।
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उनका किरदार चक दे इंडिया के कोच कबीर खान (शाहरूख खान) की याद दिलाता है जिसने अपने पर लगे कलंक को मिटाने के लिये एक युवा टीम की कमान संभाली और उसे वर्लड चैम्पियन बना दिया। हरेंद्र ने खिलाड़ियों में आत्मविश्वास और हार नहीं मानने का जज्बा भरा। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि रही कि उन्होंने युवा टीम को व्यक्तिगत प्रदर्शन के दायरे से निकालकर एक टीम के रूप में जीतना सिखाया।