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यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

 Reported By: Imran Laeek Edited By: Mangal Yadav
 Published : Mar 25, 2026 04:26 pm IST,  Updated : Mar 25, 2026 04:48 pm IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर ली। कोर्ट ने दोनों बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती- India TV Hindi
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। फाइल Image Source : PTI

प्रयागराजः यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य को अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुन्दानंद गिरी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। 27 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। 

दोनो पक्ष मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे

कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह फैसला हाई कोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर को  सुनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत देते हुए कई शर्तें भी लगाई है। सबसे अहम शर्त यह है कि दोनों पक्ष (शंकराचार्य और आशुतोष) मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे। अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो दूसरा पक्ष जमानत कैंसिलेशन अर्जी दे सकता सकता है। 

पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे शंकराचार्य 

यह फैसला सुनाने के दौरान शंकराचार्य के वकीलों ने कहा- योर ऑनर इस पर भी कहें कि कोई बच्चों को लेकर घूमने लगता है, कोई यात्रा के दौरान बयानबाजी करता है। इसे भी रोका जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न केस में 27 फरवरी को शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। तब जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा था कि फैसला आने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। शंकराचार्य पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे। 

कोर्ट में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा था, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए थे। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखी थीं। शंकराचार्य ने बटुकों के यौन उत्पीड़न मामले में 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। 

प्रयागराज में दर्ज हुआ था मामला

इससे पहले प्रयागराज की कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वह यौन शोषण के आरोपों के संबंध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ FIR दर्ज करे। अदालत के निर्देशों के बाद  झूसी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। धारा 173(4) के तहत यह अर्जी शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दायर की थी, जिसमें सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर कोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया था।

 

 

 

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