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कल्याण सिंह की सीट रही अतरौली पर किसका होगा कब्जा? जानिए यूपी चुनाव 2027 के समीकरण

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 08, 2026 02:55 pm IST,  Updated : Nov 08, 2026 02:55 pm IST

अतरौली में 1991 से 2022 तक हुए 8 विधानसभा चुनावों और 1 उपचुनाव में BJP ने 7 बार जीत दर्ज की है। एक बार कल्याण सिंह खुद राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर जीते और एक बार सपा के वीरेश यादव ने अतरौली सीट पर कब्जा किया। जानें यूपी चुनाव 2027 में अतरौली में सियासी पिच का मिजाज क्या हो सकता है।

Atrauli Assembly Seat- India TV Hindi
पढ़िए अतरौली विधानसभा सीट का सियासी इतिहास। Image Source : INDIA TV

ब्रज क्षेत्र की अतरौली विधानसभा सीट यूपी की हॉट सीटों में से एक है। अतरौली सीट का विधानसभा संख्या नंबर 73 है और यह अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। अतरौली विधानसभा सीट पर 1967 से अब तक पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह या उनके परिवार के किसी सदस्य का कब्जा रहा है। 1967 के बाद से सिर्फ 2 बार ये सीट किसी और के हाथ में गई है। 1980 में इस सीट पर एक बार कांग्रेस और 2012 में सपा के एक बार जीती थी। अतरौली सीट से पहले लगातार कल्याण सिंह विधायक बनते रहे। फिर उनकी बहू प्रेमलता देवी विधायक चुनी गईँ और अब उनके पोते संदीप सिंह अतरौली से विधायक हैं। बीजेपी के टिकट पर जब भी कल्याण सिंह या उनके परिवार का कोई भी सदस्य अतरौली सीट से लड़ा है तो उसने हर बार जीत हासिल की है। जानिए अतरौली सीट के सियासी इतिहास की कहानी और यहां यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में बनने वाले सियासी समीकरणों के बारे में।

1991 में चुनाव जीतकर 7वीं बार अतरौली के विधायक बने कल्याण सिंह

1991 में बीजेपी के कल्याण सिंह और कांग्रेस के अनवर खान के बीच एक बार फिर मुकाबला था। राम लहर वाले इस चुनाव में कल्याण सिंह ने अनवर खान को 27,377 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया था। कल्याण सिंह को 58,640 वोट मिले थे, जबकि अनवर खान 31,263 वोट ही हासिल कर पाए थे। इसी के साथ कल्याण सिंह 7वीं बार अतरौली के विधायक बने। यह अतरौली सीट पर उनकी लगातार तीसरी जीत थी।

1993 में कल्याण सिंह ने अनवर खान को फिर दी मात

विधानसभा चुनाव 1993 में कल्याण सिंह और अनवर खान दोनों फिर आमने-सामने आए। इस चुनाव में बीजेपी के कल्याण सिंह ने 73,789 वोट पाकर अनवर खान को 18,366 वोटों के अंतर से हरा दिया था। अनवर खान को इस बार जनता ने 55,423 वोट दिए थे।

कल्याण सिंह ने लगातार 5वीं बार अनवर खान को हराया

1996 में भी मुकाबला बीजेपी के कल्याण सिंह और कांग्रेस के अनवर खान के बीच हुआ। कल्याण सिंह को इस बार 73,329 वोट मिले, जबकि अनवर खान की पारी 42,634 वोटों पर सिमट गई। कल्याण सिंह ने इस चुनाव में 30,695 वोटों से जीत दर्ज की थी।

2002 में अपनी नई-नवेली पार्टी के टिकट पर लड़े कल्याण सिंह

विधानसभा चुनाव 2002 में कल्याण सिंह बीजेपी के बजाय अपनी पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। बीजेपी से वह अब दूरी बना चुके थे। पार्टी बदलने के बावजूद जीत इस बार भी कल्याण सिंह के पाले में आई। कल्याण सिंह ने 35,148 वोटों से यह चुनाव जीत लिया था। कल्याण सिंह ने 61,838 वोट हासिल किए थे, जबकि उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी की उमेश कुमारी 26,690 वोट ही पा सकी थीं। इस चुनाव में 20,148 वोट पाकर तीसरे नंबर पर BSP के विनोद कुमार उर्फ अभय शर्मा रहे थे। कांग्रेस के अनवर खान चौथे नंबर पर खिसक गए थे और उन्हें 15,643 वोट मिले थे। वहीं, सपा के साहब सिंह को 5वें नंबर से 6,678 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था।

2004 के उपचुनाव में कल्याण सिंह की बहू ने हासिल की विजय

फिर, 2004 में कल्याण सिंह बुलंदशहर से सांसद बन गए और उन्होंने अतरौली सीट छोड़ दी। कल्याण सिंह के अतरौली सीट से इस्तीफे के बाद 2004 में उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में बीजेपी ने पार्टी का टिकट कल्याण सिंह की बहू यानी राजवीर सिंह उर्फ रज्जू भैया की पत्नी प्रेमलता देवी को दिया। उन्हें 61,036 वोट मिले। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अशोक कुमार को 10,564 वोटों के अंतर से हराया।

BSP लहर भी नहीं हिला पाई कल्याण सिंह के परिवार का गढ़

2007 के विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में BSP की लहर थी। इसके बावजूद विरोधी कल्याण सिंह के परिवार से ये सीट नहीं छीन पाए। बीजेपी की प्रत्याशी प्रेमलता देवी ने बसपा के हरीश शर्मा को 21,150 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। प्रेमलता को जनता ने 50,390 वोट दिए, जबकि हरीश शर्मा 29,240 वोट ही पा सके। सपा के राकेश पाल सिंह इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें 15,885 वोट मिले थे।

2012 में सपा ने पहली बार जीती अतरौली सीट

विधानसभा चुनाव 2012 में सपा के वीरेश यादव ने बाजी पलट दी और 54,785 वोट हासिल कर अतरौली सीट पहली बार जीत ली। इस चुनाव में कल्याण सिंह का परिवार फिर से बीजेपी से दूरी बना चुका था। प्रेमलता देवी इस बार कल्याण सिंह की पार्टी जन क्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) की प्रत्याशी थीं। वह 45,918 वोट ही हासिल कर सकी थीं और 8,867 वोटों के अंतर से चुनाव हार गई थीं। अतरौली सीट पर सपा की यह इकलौती जीत रही। इस चुनाव में BSP के साकिब 42,436 वोट पाकर तीसरे और कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 30,517 वोट हासिल कर चौथे नंबर पर रहे थे। बीजेपी इस चुनाव में 5वें नंबर पर खिसक गई थी। उसके प्रत्याशी राजेश कुमार भारद्वाज को जनता ने 22,671 वोट दिए थे।

वर्ष विजेता पार्टी वोट रनरअप पार्टी वोट जीत का अंतर
1991 कल्याण सिंह बीजेपी 58,640 अनवर खान कांग्रेस 31,263 27,377
1993 कल्याण सिंह बीजेपी 73,789 अनवर खान कांग्रेस 55,423 18,366
1996 कल्याण सिंह बीजेपी 73,329 अनवर खान कांग्रेस 42,634 30,695
2002 कल्याण सिंह राष्ट्रीय क्रांति पार्टी 61,838 उमेश कुमारी बीजेपी 26,690 35,148
2004 (उपचुनाव) प्रेमलता देवी बीजेपी 61,036 अशोक कुमार सपा 50,472 10,564
2007 प्रेमलता देवी बीजेपी 50,390 हरीश शर्मा बसपा 29,240 21,150
2012 वीरेश यादव सपा 54,785 प्रेमलता देवी जन क्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) 45,918 8,867
2017 संदीप कुमार सिंह बीजेपी 1,15,397 वीरेश यादव सपा 64,430 50,967
2022 संदीप कुमार सिंह बीजेपी 1,25,691 वीरेश यादव सपा 86,367 39,324

(Source- Election Commission Of India)

अतरौली में BJP और कल्याण सिंह के परिवार की वापसी

2017 के चुनाव में बीजेपी और कल्याण सिंह के परिवार, दोनों ने अतरौली सीट पर वापसी कर ली। इस चुनाव में कल्याण सिंह के पोते और प्रेमलता देवी के बेटे संदीप कुमार सिंह को बीजेपी ने सियासी मैदान में उतारा। संदीप सिंह ने 1,15,397 वोट पाकर सपा के वीरेश यादव को 50,967 वोटों के भारी-भरकम अंतर से हरा दिया। वीरेश यादव 64,430 वोट ही हासिल कर सके थे। BSP के इलियास चौधरी इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे, उन्हें 45,041 वोट मिले थे।

2022 में एक बार फिर जीते संदीप सिंह

2022 में बीजेपी के संदीप सिंह को एक बार फिर अतरौली सीट जीतने में कामयाबी मिली। संदीप सिंह ने इस बार सपा के वीरेश यादव को 39,324 वोटों के अंतर से हराया। संदीप सिंह को जनता ने 1,25,691 वोट दिए, जबकि वीरेश यादव की पारी 86,367 वोटों पर सिमट गई। BSP इस चुनाव में एक बार फिर तीसरे नंबर पर रही और उसके उम्मीदवार डॉ. ओमवीर सिंह को 23,134 वोट मिले। कांग्रेस 2022 के चुनाव में चौथे नंबर पर ही थी और उसके प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार को 1331 वोट मिले थे।

2027 में अतरौली विधानसभा सीट के सियासी समीकरण

अतरौली सीट के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां लोधी, यादव और अनुसूचित जाति वोटर निर्णायक संख्या में हैं। इसके अलावा, जाट, मुस्लिम, ब्राह्मण, क्षत्रिय, कश्यप, बघेल, बनिया, सैनी और नाई समाज के मतदाताओं की गोलबंदी भी अहम है। पिछले तीन दशकों के चुनावों की बात करें तो अतरौली में 1991 से लेकर 2022 तक हुए 8 सामान्य विधानसभा चुनावों और 1 उपचुनाव में बीजेपी को 7 बार जीत मिली है। 1 बार कल्याण सिंह ने ही 2002 के चुनाव में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर अतरौली से जीत दर्ज की थी। सपा का यहां सिर्फ 1 बार जीत मिली है, वह भी 2012 में तब जब पूरे प्रदेश में सपा की लहर चल रही थी और कल्याण सिंह की बहू बीजेपी के बजाय जन क्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं।

2027 के विधानसभा चुनाव में बनने वाले सियासी समीकरणों की बात करें तो जब भी इस अतरौली सीट पर कल्याण सिंह के परिवार का कोई भी सदस्य बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा है तो चुनाव में जीत आसानी से हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव में एक पाले में BJP और दूसरे पाले में सपा-कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है। चूंकि, पिछले चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अतरौली में कुछ खास नहीं रहा था और इसलिए विधानसभा चुनाव में सीधी टक्कर बीजेपी और सपा के बीच हो सकती है।

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