उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में बेटे को पाने के लिए 15 साल से भटक रही उर्मिला की मुराद बुधवार को पूरी हो गई। बिछड़े बेटे को पुलिस ने मां से मिला दिया। बेटे को गले लगाने के बाद उर्मिला की आंखों से आंसू की धारा बहने लगी और उसने अधिकारियों को धन्यवाद दिया। खास बात यह है कि बेटे का ठिकाना मालूम होने के बाद भी वह उसे पाने के लिए पिछले 15 वर्षों से अफसरों के दफ्तर के चक्कर काट रही थी, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
मूलरूप से बिहार की रहने वाली उर्मिला की करीब 20 साल पहले नरसेना निवासी सुशील के साथ शादी हुई थी। शादी के बाद उर्मिला ने एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम हरिओम रखा गया। हरिओम के जन्म के बाद पिता सुशील की मृत्यु हो गई। इस सदमे के चलते उर्मिला की दिमागी हालत बिगड़ गई और वह स्याना में रहने लगी।
बेटे को ताऊ ने पाला
इस दौरान हरिओम उसके परिवार के ही रिश्ते के ताऊ के साथ गांव नरसेना में रहने लगा। वहीं, उसका पालन पोषण हुआ। दिमाग का संतुलन बिगड़ने के बाद भी उर्मिला बेटे से मिलने गांव आती रही और वह उसे अपने साथ ले जाने की जिद करती, लेकिन बच्चा उसके साथ जाने से इनकार कर देता। बीते 15 वर्षों में उसने थाने से लेकर जिलाधिकारी, एसएसपी और मुख्यमंत्री दरबार तक गुहार लगाई, लेकिन उसे बेटा नहीं मिला। बीते शनिवार को आयोजित समाधान दिवस में उसने नरसेना थाने में जाकर शिकायत पत्र दिया और थाना प्रभारी रितेश कुमार सिंह से बेटे को पाने की गुहार लगाई।
पुलिस ने मां-बेटे को बुलाया
थाना प्रभारी ने स्याना सीओ प्रखर पांडे और एसडीएम गजेंद्र सिंह से इस मामले में बात की। इन अधिकारियों ने बिछड़े बेटे को मां से मिलाने की पहल शुरू की। स्याना सीओ प्रखर पांडे ने हरिओम को खोज कर अपने कार्यालय बुलाया और उर्मिला को सुपुर्द कर दिया। उधर, एसडीएम गजेंद्र सिंह ने बताया कि महिला को सरकारी सहायता भी दिलवाने की तैयारी की जा रही है। स्याना सीओ प्रखर पांडे का कहना है कि हरिओम को उसकी मां उर्मिला के सुपुर्द किया है। वह मां के साथ रहने को तैयार हो गया है।
(बुलंदशहर से वरुण शर्मा की रिपोर्ट)