उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरूरपुर विकास क्षेत्र में स्कूल की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर नंबर-1 में छुट्टी के बाद एक छात्रा के कक्षा में बंद रह जाने के मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने प्रधानाध्यापक और एक सहायक शिक्षक को निलंबित कर दिया है। इस मामले में तीन अन्य सहायक अध्यापिकाओं के खिलाफ परिनिंदा प्रविष्टि (Censure Entry) दर्ज करने और उन्हें कड़ी चेतावनी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
छुट्टी के बाद कक्षा पर लगा दिया गया ताला
बीएसए आशा चौधरी के निलंबन आदेश के अनुसार, 25 जुलाई को स्कूल की छुट्टी के बाद कक्षा पांच की छात्रा रश्मि कक्षा में ही रह गई। कक्षा पर ताला लगा दिया गया। बाद में ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष ने स्कूल का ताला खुलवाकर छात्रा को सुरक्षित बाहर निकाला।
जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच
इस घटना के बाद छात्रा की दादी ने शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि प्रधानाध्यापक राजीव कुमार स्कूल की छुट्टी से पहले ही चले गए थे और उन्होंने विद्यालय की जिम्मेदारी मौखिक रूप से सहायक शिक्षक उमेश कुमार को सौंप दी थी।
छुट्टी के बाद नियम का नहीं हुआ पालन
जांच में यह भी सामने आया कि शासन के निर्देशों के बावजूद छुट्टी के बाद निर्धारित 30 मिनट तक स्कूल में रुकने के नियम का पालन नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, विद्यालय बंद करने से पहले कक्षाओं का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया और छात्रों से ही कक्षाओं में ताला लगवाया गया।
प्रिंसिपल राजीव कुमार और सहायक शिक्षक उमेश कुमार निलंबित
इस लापरवाही के कारण छात्रा कक्षा में बंद रह गई, जिसे गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चूक माना गया। बीएसए ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर प्रिंसिपल राजीव कुमार और सहायक शिक्षक उमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
3 टीचरों को लगाई गई फटकार
निलंबन अवधि में दोनों को क्रमश: विकास क्षेत्र परीक्षितगढ़ और परतापुर से संबद्ध किया गया है। इसके अलावा, बीएसए ने 3 सहायक अध्यापिकाओं के खिलाफ परिनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और कड़ी चेतावनी जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले की विभागीय जांच अलग से जारी रहेगी। यहां बता दें कि परिनिंदा प्रविष्टि (Censure Entry) सरकारी कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में दर्ज की जाने वाली आधिकारिक फटकार है। (भाषा के इनपुट के साथ)
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