मेरठ में ललिता गौतम मर्डर केस में सियायत शुरू हो गई है। शुक्रवार को लंबे वक्त के बाद मायावती भी सामने आईं। मायावती ने चन्द्रशेखर आजाद जैसे नेताओं को दलितों का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि वोटों के चक्कर में कुछ लोग घडियाली आंसू बहाने दलितों के बीच पहुंच जाते हैं। उनके लिए करते तो कुछ नहीं। उल्टे गरीबों को कानूनी पचड़ों में फंसा कर गायब हो जाते हैं। असल में मुद्दा दलित लड़की की हत्या का था। ललिता गौतम की हत्या के खिलाफ भीम आर्मी के लोग प्रोटेस्ट कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हो गई। मेरठ के SSP ने प्रदर्शनकारियों की पिटाई की। आठ लोग गिरफ्तार हुए।
चन्द्रशेखर की पुलिस के साथ तीखी बहस
इसके बाद भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर ने एलान कर दिया कि वो मेरठ जाएंगे। दलित लड़की के परिवार से मिलेंगे। प्रोटेस्टर्स को थप्पड़ मारने वाले SSP के खिलाफ एक्शन की मांग करेंगे। शुक्रवार को मेरठ और आसपास के जिलों से भीम आर्मी के सपोर्टर के साथ चन्द्रशेखर आजाद रावण मेरठ के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें मेरठ के बॉर्डर पर ही रोक लिया तो चन्द्रशेखर पुलिस वालों से ही भिड़ गए।
हालांकि, चंद्रशेखर आज़ाद को मेरठ जाने दिया गया, लेकिन मेरठ जाने से पहले रोहाना टोल प्लाजा पर उनकी पुलिस वालों के साथ काफी तीखी बहस हुई। पुलिस ने चंद्रशेखर आज़ाद के काफिले की कुछ गाड़ियों को टोल प्लाजा पर ही रोक दिया, जिसके बाद वो पुलिस इंस्पेक्टर पर बरस पड़े। हालांकि दो घंटे की नोंकझोंक के बाद भीम आर्मी के चीफ को प्रशासन ने मेरठ में घुसने की इजाजत दे दी। चन्द्रशेखर आजाद ने अपने सपोर्टर्स को संबोधित भी किया।
मायावती ने चंद्रशेखर आजाद पर साधा निशाना
इसके बाद बीएसपी अध्यक्ष मायावती भी एक्शन में आईं। मायावती ने दलित लड़की की हत्या की निंदा की। परिवार को न्याय देने की मांग की। इसके बाद मायावती ने बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ नेता दलितों के लिए घडियाली आंसू बहा रहे हैं। उन लोगों की निगाह दलितों के वोट पर है। दलितों को ऐसे नेताओं के बहकावे में नहीं आना चाहिए। क्योंकि भड़काने वाले तो निकल जाएंगे और जो इनके चक्कर में फंसकर सड़क पर उतरेंगे वो जेल पहुंच जाएंगे। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाएंगे।
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कानून के दायरे में रहकर उठाएं अत्याचार के खिलाफ आवाज
मायावती ने कहा कि बीएसपी ही दलितों की हितैषी है। दलितों को उनके अधिकार मिलें। इसके लिए जरूरी है। दलित एकजुट रहें और सत्ता की चाभी बीएसपी को सौंपे। मायावती ने कहा कि अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है लेकिन कानून के दायरे में रहकर। चुनाव के देखते हुए आजकल कुछ संगठन और नेता दलितों को भड़का रहे हैं। इनकी वजह से पहले दलितों पर अत्याचार होता है और बाद में ये नेता मगरमच्छी आंसू बहाने के लिए वहां पहुंच जाते हैं। चंद्रशेखर रावण शुक्रवार को ही मेरठ गए। ऐसे में मायावती के इस बयान की टाइमिंग बहुत इम्पोर्टेंट है। मायावती ने दलितों को सलाह दी कि अगर उन्हें कोई समस्या है तो संविधान में बताए गए तरीकों के हिसाब से कानूनी रास्ता चुनें। किसी को बहकावे में आकर सड़कों पर प्रोटेस्ट ना करें।
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चन्द्रशेखर ने मायावती को दिया जवाब
मायावती ने चन्द्रशेखर आजाद पर दलितों के लिए मगरमच्छी आंसू बहाने की बात कही तो चन्द्रशेखर ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर वाकई में मायावती को दलितों के दर्द का एहसास होता तो घर में बैठकर बयान न देती। मेरठ में आकर पीड़ित परिवार से मिलती। पुलिस के जुल्म का विरोध करती। चंद्रशेखर ने कहा कि उन्होंने कभी मायावती पर पर्सनल कमेंट नहीं किया, लेकिन आज मायावती ने जिस तरह उन पर निजी टिप्पणी की, उससे वो निराश हैं।
मायावती ने दलितों से एकजुट होने की अपील की तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अपने दलित नेताओं को आगे किया। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि अब पूरा देश जानता है कि मायावती बीजेपी की लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ती हैं। बीजेपी जो चाहती है, मायावती वही कहती हैं। इसलिए मायावती की बात का अब कोई असर नहीं होता।
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