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वर्दी के भीतर धड़कता रहा मां का दिल, खोई मूक-बधिर बच्ची को मां से मिलाकर रो पड़ी महिला सिपाही

 Edited By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Jun 25, 2026 08:28 pm IST,  Updated : Jun 25, 2026 08:28 pm IST

कानपुर के ग्वालटोली थाने की महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। उन्होंने थाने पहुंची एक गुमशुदा और मूक-बधिर आठ साल की बच्ची को उसकी मां से मिलाया।

Lady Constable- India TV Hindi
महिला सिपाही रोते हुए Image Source : REPORTER INPUT

पुलिस की वर्दी अक्सर कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाती नजर आती है, लेकिन कानपुर के ग्वालटोली थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक मां का दिल भी धड़कता है। आठ साल की एक मूक-बधिर बच्ची को उसकी मां से मिलाने की कहानी ने न सिर्फ पुलिस विभाग बल्कि पूरे शहर को भावुक कर दिया। जब कई घंटों तक अपने परिवार से बिछड़ी एक मासूम बच्ची थाने में पहुंची तो किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले दो दिन में यह कहानी हजारों लोगों की आंखें नम कर देगी। बच्ची अपनी बात बोल नहीं सकती थी, सुन नहीं सकती थी, लेकिन उसकी आंखों में अपने परिवार को खोजने की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।

अलम के जुलूस के पीछे-पीछे घर से दूर निकल गई मासूम

जानकारी के अनुसार नजीराबाद निवासी काबुल शेख और रेशमा खातून की आठ वर्षीय बेटी परवीन जन्म से मूक-बधिर है। सोमवार को घर के बाहर खेलते समय इलाके से गुजर रहे अलम के जुलूस को देखकर वह उसके पीछे-पीछे चल दी। उस समय घर पर कोई बड़ा मौजूद नहीं था। जब शाम को मां घर लौटी तो बेटी घर में नहीं थी। पहले आसपास तलाश की गई, फिर रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ हुई, लेकिन परवीन का कहीं पता नहीं चला। रात बढ़ने के साथ मां की बेचैनी भी बढ़ती गई। आखिरकार परिवार ने पुलिस से मदद मांगी।

सड़क किनारे अकेली बैठी मिली बच्ची

देर रात गश्त कर रही पुलिस टीम को शीलिंग हाउस स्कूल के पास सड़क किनारे एक बच्ची अकेली बैठी मिली। पुलिसकर्मियों ने उससे नाम और पता पूछने की कोशिश की, लेकिन बच्ची कुछ बता नहीं सकी। बाद में पता चला कि वह मूक-बधिर है। ऐसे में पुलिस उसे ग्वालटोली थाने लेकर पहुंची और महिला हेल्प डेस्क के सुपुर्द कर दिया गया। यहीं से शुरू हुई एक ऐसी कहानी, जिसने इंसानियत की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

भूख लगी थी, इशारों में मांगा खाना

अगली सुबह जब महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ड्यूटी पर पहुंचीं तो उन्होंने एक सहमी हुई बच्ची को कोने में बैठे देखा। बच्ची ने उनका हाथ पकड़ा और इशारों में खाना मांगा। उस मासूम की आंखों में भूख और अपनापन दोनों दिखाई दे रहे थे। मंदाकिनी ने बिना देर किए थाने की मेस से खाना मंगवाया। उन्होंने अपने हाथों से बच्ची को खाना खिलाया। बच्ची बड़े प्यार से खाना खाती रही और बार-बार उनकी ओर देखती रही, मानो उसे किसी अपने का सहारा मिल गया हो।

मां की तरह नहलाया, नए कपड़े पहनाए

खाना खाने के बाद बच्ची ने इशारों में नहाने की इच्छा जताई। इसके बाद मंदाकिनी उसे थाने परिसर में लगे हैंडपंप के पास ले गईं और अपनी बेटी की तरह उसे नहलाया। वहीं महिला उपनिरीक्षक कंचन रागिनी बच्ची के लिए नए कपड़े खरीदकर लाईं। जब परवीन ने नए कपड़े पहने तो उसके चेहरे पर जो मुस्कान थी, उसने वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मियों का दिल जीत लिया।

सोशल मीडिया बनी मां-बेटी के मिलन की कड़ी

बच्ची के परिवार का पता लगाने के लिए पुलिस ने उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। इंस्टाग्राम पर डाली गई रील कुछ ही घंटों में तेजी से वायरल हो गई। वहीं उधर, अपनी बेटी को खोज रही मां रेशमा खातून को भी यह वीडियो दिखाया गया। वीडियो देखते ही उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने तुरंत कहा कि यही मेरी बेटी है। इसके बाद पुलिस ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें ग्वालटोली थाने बुलाया।

मां को देखते ही खिल उठी परवीन

बुधवार दोपहर जब रेशमा खातून थाने पहुंचीं तो उनकी बेटी परवीन वहीं बैठी थी। जैसे ही परवीन की नजर अपनी मां पर पड़ी, उसका चेहरा खिल उठा। वह दौड़कर मां से लिपट गई। मां-बेटी एक-दूसरे को कसकर पकड़े रहीं। दोनों की आंखों से आंसू बह रहे थे। वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।

सोचा था अगर कोई नहीं मिला तो मैं ही पालूंगी- महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सबसे ज्यादा भावुक महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी नजर आईं। मां-बेटी के मिलन को देखकर उनकी आंखों से भी आंसू निकल पड़े, उन्होंने कहा कि मेरे दो बेटे हैं, लेकिन बेटी नहीं है। इन दो दिनों में यह बच्ची मुझे अपनी बेटी जैसी लगने लगी थी। मैंने इसे अपने हाथों से खाना खिलाया, नहलाया और इसकी देखभाल की। मन में यह भी आया था कि अगर इसका कोई परिवार नहीं मिला तो मैं इसे अपने पास रखकर पालूंगी।

वर्दी के पीछे छिपी मां की ममता

मंदाकिनी मूल रूप से मैनपुरी की रहने वाली हैं और पिछले एक वर्ष से ग्वालटोली थाने में तैनात हैं। उनके दो छोटे बेटे हैं। परवीन से जुड़ाव इतना बढ़ गया था कि जब बच्ची अपने परिवार के साथ जाने लगी तो उनकी आंखें नम हो गईं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ कानून लागू करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर समाज की सबसे बड़ी सहारा भी बन सकती है। कानपुर की इस कहानी में एक खोई हुई बच्ची को उसका परिवार मिला, लेकिन साथ ही लोगों को वर्दी के भीतर छिपी इंसानियत का चेहरा भी देखने को मिला।

कानपुर से संवाददाता अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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