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मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर क्या BJP खत्म कर पाएगी 20 साल का सूखा? UP चुनाव 2027 में क्या होंगे सियासी समीकरण

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Oct 16, 2026 12:37 am IST,  Updated : Oct 16, 2026 12:37 am IST

मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा पिछले 19 साल से समाजवादी पार्टी का गढ़ बनी हुई है। 2007 के बाद से अब तक हुए चार चुनावों में सपा ने सिर्फ जीत ही दर्ज नहीं की, बल्कि अपनी जीत का अंतर भी बढ़ाया है। जानें 2027 में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर क्या सियासी समीकरण बनेंगे।

UP Assembly Election 2027- India TV Hindi
पढ़िए मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास। Image Source : INDIA TV

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प है। मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र पिछले 19 साल से समाजवादी पार्टी का गढ़ बना हुआ है। सपा ने अपने प्रत्याशी बदले, इसके बावजूद पिछले 4 विधानसभा चुनावों में जीत उसी की हुई। यहां जनता दल, BJP और कांग्रेस को भी एक-एक बार जीत मिली है, लेकिन पिछले कई विधानसभा चुनावों से सपा ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बना रखी है। मुरादाबाद ग्रामीण सीट के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यह मुस्लिम बहुल सीट है। यहां मुस्लिम, OBC और SC वर्ग के वोटर निर्णायक संख्या में हैं। 1991 से 2022 के बीच हुए 8 विधानसभा चुनावों में सपा ने 5 बार जीत हासिल की। आइए समझते हैं कि मुरादाबाद ग्रामीण सीट का चुनावी इतिहास क्या रहा है और यहां क्या सियासी समीकरण बनने वाले हैं।

मोहम्मद रिजवानुल हक ने 1991 में लगाई जीत की हैट्रिक

1991 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर मोहम्मद रिजवानुल हक ने जीत की हैट्रिक लगाई थी। मोहम्मद रिजवानुल हक दूसरी बार जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्होंने 31,787 वोट पाकर बीजेपी के शिव कुमार सिंह को 5,217 वोटों के अंतर से हरा दिया था। शिव कुमार सिंह 26,570 वोट ही हासिल कर पाए थे। इस चुनाव में जनता पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी और उसके प्रत्याशी सौलत अली को 19,790 वोट मिले थे। 1991 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था, जिसमें आखिरकार जीत मोहम्मद रिजवानुल हक की हुई थी।

बीजेपी ने 1993 में पहली बार जीती मुरादाबाद ग्रामीण सीट

विधानसभा चुनाव 1993 में बाजी पलट गई और बीजेपी ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर पहली बार जीत हासिल की। बीजेपी के कैंडिडेट सुरेश प्रताप सिंह ने 56,098 वोट हासिल किए, जबकि समाजवादी पार्टी के सौलत अली 43,365 वोटों पर सिमट गए। बीजेपी ने यह चुनाव 12,733 वोटों के अंतर से जीत लिया था। इस चुनाव में सपा और बीएसपी गठबंधन में चुनाव लड़े थे, इसके बावजूद जीत बीजेपी की हुई थी। जनता दल के मोहम्मद रिजवानुल हक इस बार तीसरे नंबर पर खिसक गए थे और 40,116 वोट ही पास सके थे।

1996 में सपा भी पहली बार जीती मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट

मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर 1996 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सौलत अली को विजय मिली। सौलत अली ने 49,327 वोट हासिल कर निर्दलीय कैंडिडेट मोहम्मद रिजवानुल हक को 1,978 वोटों के करीबी अंतर से हरा दिया। रिजवानुल हक 47,349 वोट ही हासिल कर पाए थे। ये मुकाबला बेहद करीबी रहा था। BJP के शिवकुमार सिंह तीसरे और BSP के बलराम चौथे नंबर पर रहे थे। शिवकुमार सिंह को 36,785 वोट और बलराम को 32,624 मत मिले थे।

कांग्रेस ने 2002 में सपा को चखाया हार का स्वाद

विधानसभा चुनाव 2002 में मुरादाबाद ग्रामीण सीट से कांग्रेस के शमीमुल हक ने जीत दर्ज की। शमीमुल हक ने 52,367 वोट पाए, जबकि सपा के सौलत अली 37,450 वोटों पर ही सिमट गए। कांग्रेस ने ये चुनाव 14,917 वोटों के अंतर से जीत लिया। BSP के संजय सिंह 30 हजार 886 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं, RLD के सुरेश प्रताप सिंह 10,929 वोट ही पा सके थे। इस चुनाव में बीजेपी और RLD का गठबंधन था।

2007 में BSP लहर के बावजूद सपा ने की वापसी

यूपी विधानसभा चुनाव 2007 में सपा ने पूरे प्रदेश में BSP की लहर के बावजूद मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर कब्जा जमाया था। सपा के उस्मानुल हक को 49,194 वोट मिले थे, जबकि BJP के रामवीर सिंह 46,034 वोट ही पा सके थे। समाजवादी पार्टी कड़े मुकाबले में 3,160 वोटों के करीबी अंतर से जीत गई थी। RLD ने इस बार सौलत अली को उम्मीदवार बनाया था, जो 20,276 वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे थे। इससे कुछ कम यानी 20,092 मत बीएसपी के फिजाउल्ला चौधरी ने पाए थे, जबकि कांग्रेस 5वें नंबर पर खिसक गई थी। उसकी प्रत्याशी हाजरा बेगम की पारी 16,380 वोटों पर सिमट गई थी।

सपा ने प्रत्याशी बदलने के बावजूद 2012 में जीती मुरादाबाद ग्रामीण सीट

2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर सपा के शमीमुल हक ने जीत हासिल की। उन्होंने 72,213 वोट पाए, जबकि बीजेपी के प्रत्याशी सुरेश चंद्र सैनी को 49,477 वोट ही मिल पाए। सपा को इस चुनाव में 22,736 वोटों से जीत मिली थी। चुनाव में कांग्रेस के इफ्तकार अहमद 23,825 वोट पाकर तीसरे और BSP के मोहम्मद नासिर 23,194 वोट हासिल कर चौथे नंबर पर रहे थे।

वर्ष

विजेता (पार्टी)

वोट

रनर-अप (पार्टी)

वोट

जीत का अंतर

1991

मोहम्मद रिजवानुल हक (JD)

31,787

शिव कुमार सिंह (BJP)

26,570

5,217

1993

सुरेश प्रताप सिंह (BJP)

56,098

सौलत अली (SP)

43,365

12,733

1996

सौलत अली (SP)

49,327

मोहम्मद रिजवानुल हक (निर्दलीय)

47,349

1,978

2002

शमीमुल हक (INC)

52,367

सौलत अली (SP)

37,450

14,917

2007

उस्मानुल हक (SP)

49,194

रामवीर सिंह (BJP)

46,034

3,160

2012

शमीमुल हक (SP)

72,213

सुरेश चंद्र सैनी (BJP)

49,477

22,736

2017

हाजी इकराम कुरैशी (SP)

97,916

हरिओम शर्मा (BJP)

69,135

28,781

2022

मोहम्मद नासिर (SP)

1,43,337

कृष्णकांत मिश्रा (BJP)

86,517

56,820

(Source- Election Commission Of India)

2017 में बीजेपी की लहर भी नहीं आई काम

विधानसभा चुनाव 2017 में यूपी में बीजेपी को बड़ी जीत मिली, BJP ने अकेले दम पर 312 सीटें जीत लीं। लेकिन मुरादाबाद ग्रामीण सीट समाजवादी पार्टी के पाले में ही गई। सपा के हाजी इकराम कुरैशी ने 97,916 वोट पाकर बीजेपी के हरिओम शर्मा को 28,781 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। हरिओम शर्मा 69,135 वोट ही पा सके थे। इस चुनाव में RLD के मोहम्मद कमरानुल हक 23,404 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं, बीएसपी के पन्नालाल उर्फ बबलू सैनी को 20,054 वोटों के साथ चौथे नंबर पर संतोष करना पड़ा था।

2022 में सपा ने दर्ज की लगातार चौथी जीत

विधानसभा चुनाव 2022 में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर सपा ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। सपा के मोहम्मद नासिर को 1,43,337 मत मिले, जबकि बीजेपी के कृष्णकांत मिश्रा 86,517 वोट ही पा सके। मोहम्मद नासिर ने ये चुनाव 56,820 वोटों के भारी-भरकम अंतर से जीत लिया था। बीएसपी के अकील चौधरी को 13,598 वोटों से संतोष करना पड़ा था। इस विधानसभा चुनाव में 2017 के सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी कांग्रेस के प्रत्याशी बने थे और उन्हें महज 2,595 वोट मिले थे।

मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर 2027 का सियासी समीकरण

1991 से 2022 तक हुए 8 विधानसभा चुनावों में सपा ने 5 और जनता दल, बीजेपी व कांग्रेस ने एक-एक बार चुनाव जीता। 1996 और 2007 के विधानसभा चुनावों में मुकाबला बेहद करीबी रहा, लेकिन 2012 के बाद सपा के प्रत्याशी की जीत का अंतर लगातार बढ़ता गया। पिछले तीन चुनावों से मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है। इससे साफ होता है कि इस सीट पर मुख्य टक्कर सपा-बीजेपी दोनों पार्टियों के बीच रही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर सपा के सामने अपना गढ़ बचाने का चैलेंज है। दूसरी ओर बीजेपी है, जो 1993 के बाद एक बार भी ये सीट नहीं जीत पाई है। हालांकि, 2007 से अब तक हुए लगातार 4 चुनावों में रनरअप बीजेपी ही रही है। हालांकि, बीजेपी के लिए चिंता की बात होगी कि 2007 के चुनाव से लगातार उसकी हार का अंतर बढ़ा है। 2027 का चुनाव काफी हद तक प्रत्याशियों के चयन, गठबंधन और स्थानीय सियासी परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।

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