आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर एक लाल ट्रॉली बैग मिलने के बाद पुलिस के सामने हत्या की गुत्थी उलझ गई। इस मामले की जांच आगरा से करीब 2,000 किलोमीटर दूर चेन्नई तक जा पहुंची। दरअसल, 5 अगस्त को तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल कोच से एक लाल ट्रॉली बैग बरामद हुआ था। बैग के अंदर एक महिला के शव के कई टुकड़े मिले थे। शुरुआती जांच में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि यह महिला कौन है और इसकी हत्या आखिर कहां हुई है? करीब 19 दिनों तक आगरा और चेन्नई पुलिस ने मिलकर मामले की जांच की। इस दौरान लगभग 350 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई और एक-एक सुराग को जोड़ते हुए पुलिस ने मामले का खुलासा किया।
आगरा से चेन्नई तक पहुंचा कनेक्शन
मामले की जांच करते हुए पुलिस की टीम चेन्नई के गुडुवांचेरी तक पहुंच गई। जांच में मृतक महिला की पहचान 38 वर्षीय हयातुन निशा के रूप में हुई, जो मूल रूप से ओडिशा के जगतसिंहपुर की रहने वाली थी और चेन्नई में नौकरी करती थी। जांच में सामने आया कि हयातुन कुछ दिन पहले ही गुडुवांचेरी में असम के रहने वाले माणिकउद्दीन लश्कर के मकान में किराए पर रहने आई थी। उसके साथ उसका 17 वर्षीय बेटा भी रहता था। इसी मकान में माणिकउद्दीन, चेन्नई की रहने वाली भगवती माझी के साथ रह रहा था। पुलिस जांच के अनुसार, इसी दौरान हयातुन और माणिकउद्दीन के बीच भी नजदीकियां बढ़ गई। इसके चलते विवाद की स्थिति पैदा हुई। जांच में पैसों के लेन-देन का एंगल भी सामने आया है।
मृतका के बेटे ने दिया अहम बयान
पुलिस ने हयातुन के बेटे से भी पूछताछ की। बेटे ने बताया कि उसे अपनी मां की जीवनशैली पसंद नहीं थी और वह उनसे अलग रहने लगा था। जांच के दौरान चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन की CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बनी। 3 अगस्त की रात करीब 10 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर एक युवक और युवती लाल ट्रॉली बैग के साथ दिखाई दिए। इसके बाद यही बैग तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल कोच में रखा गया और 5 अगस्त को आगरा कैंट पहुंच गया। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस मामले की परतें खुलती गईं। 24 अगस्त को जांच टीम गुडुवांचेरी स्थित उस मकान तक पहुंची, जहां हयातुन रह रही थी। वहां पुलिस को एक बर्तन में मानव अवशेष मिले, जिन्हें जांच के लिए कब्जे में लिया गया।
अभी भी कई मामलों पर उलझी गुत्थी
शव को ठिकाने लगाने के तरीके को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या के बाद सबूत मिटाने और पहचान छिपाने के लिए आखिर किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया। आगरा कैंट पर शव मिलने के बाद उसी दिन GRP थाने में जीरो FIR दर्ज की गई थी। जांच में चेन्नई कनेक्शन सामने आने के बाद मामला चेन्नई से जुड़ी जांच एजेंसियों को ट्रांसफर किया गया। अब पुलिस की तलाश मुख्य रूप से माणिकउद्दीन लश्कर और भगवती माझी की है। दोनों के मिलने के बाद ही हत्या की वजह, घटनाक्रम और शव को आगरा तक पहुंचाने की पूरी कहानी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एक लाल ट्रॉली बैग से शुरू हुई यह मर्डर मिस्ट्री 350 CCTV कैमरों, रेलवे के लंबे सफर और कई अहम सुरागों को पार करते हुए चेन्नई पहुंच चुकी है। पुलिस को अब इस सनसनीखेज हत्या के आखिरी और सबसे अहम जवाबों का इंतजार है। (इनपुट- अंकुर कुमड़िया)
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