भारत में रहने वाली एक विदेशी महिला ने भारतीय परिवारों की अपनी जड़ों और संस्कृति से गहरे जुड़ाव की प्रशंसा की है। उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा, 'भारतीय परिवार एक काम करते हैं, काश दुनिया भी ऐसा करती। वे अपने पूर्वजों के जन्मस्थान की यात्रा करते हैं।' बता दें कि, कई भारतीय परिवारों के लिए, जीवन का कोई भी महत्वपूर्ण पड़ाव, चाहे वह शादी हो, बच्चे का जन्म हो या किसी बुजुर्ग का निधन, अपने पैतृक गांव की यात्रा के बिना अधूरा होता है। यह एक गहरी सांस्कृतिक परंपरा है जिसका उद्देश्य आशीर्वाद प्राप्त करना और अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @kseniakala नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में भारतीयों की तारीफ करते हुए केसेनिया काला नाम की महिला ने लिखा कि, 'हर परिवार और हर संस्कृति का अपना इतिहास जीवित रखने का तरीका होता है। भारत में यह एक ऐसी परंपरा है जिसकी मैं दिल से प्रशंसा करती हूं। पिछले साल, हमने पहली बार अपने बच्चों के साथ अपने पति के पैतृक गांव जाने का फैसला किया। मेरे पति और उनके माता-पिता दोनों ही वहां पले-बढ़े नहीं थे। लेकिन यहीं उनके दादा-दादी का जन्म हुआ था, और यहीं हमारी परिवार की कई पीढ़ियां उनसे पहले रहती थीं। पिछली बार जब हम यहां आए थे, तब हमारी शादी 2014 में हुई थी। इस बार हम अपने तीन बच्चों के साथ वापस आए, जब मैं अपने चौथे बच्चे के साथ गर्भवती थी।'
'पूर्वजों के रास्ते पर भी चले'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारे बच्चों को उन्हीं रास्तों पर चलने का मौका मिला जिन पर उनके पूर्वज कभी चले थे, उन रिश्तेदारों से मिलने का मौका मिला जिन्हें वे शायद कभी जान ही न पाते, और उन जगहों को जानने का मौका मिला जिनमें पीढ़ियों का पारिवारिक इतिहास समाया हुआ है। हमारे गांव में तो 15वीं सदी का एक मंदिर भी है जो प्राचीन बरगद के पेड़ों से घिरा हुआ है और सैकड़ों वर्षों से शांति से खड़ा है।' महिला ने कहा, 'एक अलग संस्कृति में पली-बढ़ी होने के कारण, इस परंपरा ने बच्चों के पालन-पोषण के बारे में मेरी सोच को बदल दिया। इसने मुझे सिखाया कि पहचान की भावना कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप अपने बच्चों को बस बता दें। यह एक ऐसा अनुभव है जो आप उन्हें प्रदान करते हैं। इन रास्तों पर चलना, पारिवारिक कहानियां सुनना और यह देखना कि उनसे पहले की पीढ़ियां कहां रहती थीं, एक ऐसा जुड़ाव पैदा करता है जो केवल शब्दों से कभी नहीं हो सकता।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
विदेशी महिला की इस भावना से कई यूजर्स गहराई से प्रभावित हुए। एक यूजर ने कमेंट बॉक्स में लिखा, 'हम अपनी संस्कृति के बिना कुछ भी नहीं हैं।'
दूसरे ने लिखा कि, 'जी मैडम, यह हमारे धर्म की शिक्षा है। पीढ़ियों के साथ विकसित होना, लेकिन हमेशा अपनी जड़ों को याद रखना।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'दुर्भाग्य से, मेरा पैतृक गांव अब पाकिस्तान में है, और हमें यह भी नहीं पता कि वह कहां है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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