गुजरात के सूरत की एक महिला माया गुप्ता की एक साल की मेहनत और इंतजार आखिरकार रंग लाया। उन्होंने पूरे 365 दिनों तक यूट्यूब स्टार मिस्टरबीस्ट (असली नाम जिमी डोनाल्डसन) को अपने वीडियो में टैग किया और साथ ही अपने समुदाय के जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाती रहीं। चुनौती के आखिरी दिन मिस्टरबीस्ट खुद उनके सामने आए और उन्हें 10,000 डॉलर (लगभग 9.5 लाख रुपये) का तोहफा दिया।
इंस्टाग्राम पर शेयर की पोस्ट
माया गुप्ता ने अगस्त 2025 में यह चुनौती शुरू की थी। उनका एकमात्र लक्ष्य था- दुनिया के सबसे लोकप्रिय यूट्यूब क्रिएटर्स में से एक मिस्टरबीस्ट से मिलना। उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट @mayaforbeast बनाया और रोजाना वीडियो पोस्ट करती रहीं। हर वीडियो में मिस्टरबीस्ट को टैग करतीं और अपने काम का अपडेट देतीं। लेकिन सिर्फ टैगिंग ही नहीं, उन्होंने चुनौती को समाज सेवा से जोड़ दिया। सूरत में गरीब बच्चों, परिवारों और जरूरतमंदों को रोज खाना खिलातीं, कपड़े और स्कूल बैग बांटतीं तथा छोटे स्ट्रीट वेंडर्स की मदद करतीं। ये सारा खर्च अपनी बचत से उठाती थीं। दिन बीतते गए और माया का यह मिशन ऑनलाइन फॉलोअर्स हासिल करने लगा। हजारों लोग उनके जर्नी को फॉलो करने लगे। सितंबर 2026 में ब्रेकथ्रू आया जब मिस्टरबीस्ट ने उनका ईमेल और WhatsApp नंबर मांगा। इससे उम्मीदें बढ़ गईं कि मुलाकात जल्द हो सकती है। आखिरकार चुनौती के 365वें दिन यह मुलाकात हुई।
मिस्टर बीस्ट ने खुद की मुलाकात
मिस्टरबीस्ट ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में माया का परिचय देते हुए कहा, “यह माया है, जो पिछले एक साल से अपने आस-पास के लोगों को खाना खिला रही है और अपने सभी वीडियो में मुझे टैग करती रही है। मैंने देखा कि पिछले एक साल में उसने अपने समुदाय के लिए कितने अच्छे काम किए हैं। मैं उसे एक तोहफ़ा देना चाहता था।” उन्होंने माया को गले लगाया और 10,000 डॉलर का सूटकेस थमाया। माया भावुक हो गईं। उन्होंने संकेत दिया कि वे इस पैसे को सिर्फ अपने लिए नहीं रखेंगी बल्कि समुदाय की मदद जारी रखने में लगाएंगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और करोड़ों व्यूज हासिल कर चुका है। सोशल मीडिया पर लोग माया की दृढ़ता और सेवा भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि लगन और अच्छे काम का फल जरूर मिलता है। मिस्टरबीस्ट अपनी फिलैंथ्रॉपी और बड़े गिवअवे के लिए जाने जाते हैं। उनका यह जेस्चर भी उसी स्टाइल में है।
माया का आगे का प्लान
माया गुप्ता ने अपनी चुनौती को सिर्फ पर्सनल गोल नहीं बल्कि सामूहिक भलाई से जोड़ा। इससे उनके काम को और मजबूती मिली और अंत में मिस्टरबीस्ट का ध्यान भी खींचा। सूरत से शुरू हुई यह यात्रा अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। माया अब इस राशि से अपनी सेवा को और बड़ा रूप देने की योजना बना रही हैं। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सोशल मीडिया को सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सकारात्मक बदलाव का माध्यम बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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