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हाईराइज बिल्डिंग vs मोहल्ले में रहना...कहां रहना सबसे बेस्ट है? शख्स ने Video शेयर कर बताई कड़वी सच्चाई

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Sep 05, 2026 12:16 pm IST,  Updated : Sep 05, 2026 12:16 pm IST

सोशल मीडिया पर एक शख्स ने हाईराइज बिल्डिंग और मोहल्लों की तुलना करते हुए बताया है कि दोनों जगहों पर क्या अंतर देखने को मिलता है।

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शख्स का वीडियो वायरल। Image Source : IG/@ABHAYCONFUSED

ऊंची इमारतों में आधुनिक सुविधाएं, हरे-भरे पार्क और शानदार नजारे देखने को मिल सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति ने तर्क दिया है कि ऐसे हाईराइज बिल्डिंगों के अंदर जीवन कभी-कभी घनिष्ठ संबंधों की कीमत पर आ सकता है। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में एक व्यक्ति ने आधुनिक हाईराइज सोसाइटियों और पुराने मोहल्लों-कॉलोनियों के जीवन की तुलना करते हुए सामुदायिक भावना (सेंस ऑफ कम्युनिटी) के अभाव पर जोर दिया है। अभय नाम के इस व्यक्ति ने ऊंची इमारतों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये बाहर से आकर्षक लगती हैं, लेकिन अंदर की हकीकत अलग है। उनका कहना है कि यहां वास्तविक समुदाय की भावना गायब है। 

हाईराइज की कड़वी की सच्चाई बताई

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @abhayconfused नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में अभय ने कहा, “क्या आप ये ऊंची बिल्डिंग्स देख रहे हैं? इन्हें देखकर आपको भी लग सकता है कि काश हम भी ऐसी बिल्डिंग में रहते, जहां घर के आसपास ऐसा पार्क हो। भाई, आपको इसकी असल कहानी नहीं पता। ये सब सिर्फ देखने में अच्छे लगते हैं, ये बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स। लेकिन अगर... अगर उसी फ्लोर पर किसी की मौत हो जाए या कोई मुसीबत आ जाए, तो दूसरे फ्लोर वाला या बगल वाला—यानी जिसकी रूम एडजसेंट हो—वो भी भाई मदद के लिए नहीं आएगा। यही सोसाइटी की हकीकत है।”   

'मोहल्ले में मुश्किल समय में लोग काम आते हैं'

उन्होंने पुराने गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों के जीवन से तुलना करते हुए बताया कि वहां मुश्किल के समय लोग एक-दूसरे के काम आते हैं। “कम से कम हमारी गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों वाले तो हैं, जो अगर किसी के घर मुसीबत आ जाए तो कठिन समय में भी मदद के लिए पहुंच जाते हैं। लेकिन यहां भाई, वैसा कुछ नहीं है। यहां सिर्फ नाम की सोसाइटी है, लेकिन कोई आपका हाल-चाल नहीं पूछेगा। अगर कोई अपना हो तो पूछे, वरना कोई आपको जानता ही नहीं, भाई। हर कोई अपने काम में लगा रहता है।”  

यूजर्स बोले- 'हेल्प की कमी फील होती है'

यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। कई लोगों ने इससे सहमति जताई कि आधुनिक हाईराइज सोसाइटियों में सुविधाएं, पार्क, सिक्योरिटी और आधुनिक जीवनशैली तो मिलती है, लेकिन पड़ोसियों के बीच व्यक्तिगत जुड़ाव और आपसी सहयोग की कमी महसूस होती है। पुराने मोहल्लों में जहां लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते थे, वहां हाईराइज में अक्सर लोग अपने फ्लैट की चारदीवारी तक सीमित रह जाते हैं। लिफ्ट में मिलने पर भी ज्यादातर बातचीत औपचारिक या न के बराबर होती है।

यूजर्स की प्रतिक्रियाएं

इस पोस्ट पर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी और सामुदायिक जीवन पर अपने विचार साझा किए। 

एक व्यक्ति ने लिखा, "यह कई समाजों में दुखद रूप से सच है।" 

दूसरे ने टिप्पणी की, "पुराने मोहल्लों में एक अलग ही अपनापन होता था।" 

तीसरे यूजर ने कहा, "अच्छे पड़ोसी सचमुच एक वरदान हैं।" 

जबकि एक अन्य ने कहा, "आधुनिक जीवन आश्चर्यजनक रूप से अकेलापन भरा हो सकता है।"

गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने हाईराइज बिल्डिंग में रहने का अनुभव शेयर किया था और वहां रहने को माचिस डिब्बियों में कैद बताया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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